
पुलिस की सफलता पर बधाई, लेकिन लापरवाही से चली गई वक़ील की जान, जमीन के सौदागर बने सुरक्षा का दंभ भरने वाले
हत्या के बाद से ही उजागर हो गया था कि वकील की हत्या सुपारी देकर करवाई, करेरा टीआई क्या करते रहे..? यह है बड़ा सवाल
शिवपुरी जिले के करेरा नगर में घड़ियाली मोहल्ले से नया न्यायालय तक जाने के के एक शार्टकट रास्ते में करेरा के सीनियर एडवोकेट संजय सक्सेना की दिनदहाड़े छाती के गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने 18 घंटे में हत्यारोपी गिरफ्तार कर लिए, यानि पुलिस को पता था कि वक़ील की जान लेने के लिए कौन सुपारी दे रहा है। इस पूरे घटनाक्रम में बड़ा सवाल यह है कि जब पुलिस को पता था कि वक़ील की हत्या कौन करवाने की तैयारी कर रहा है, और यह बात खुद वक़ील ने भी पुलिस को बताई थी, तो फिर इस हत्याकांड के आरोपी भले ही गोली मारने वाले हैं, लेकिन करेरा पुलिस भी अपना पल्ला इससे झाड़ नहीं सकती।
करेरा थाने में पदस्थ टीआई विनोद छवाई हैं, जो शिवपुरी में लंबी पारी खेल चुके हैं। जब यह मगरौनी चौकी प्रभारी थे, तब इनके कार्यकाल में मगरौनी में सबसे बड़ी डकैती हुई थी, जिसका माल आज तक बरामद नहीं हो पाया। उस मामले में चौकी प्रभारी रहे विनोद छावई का नाम भी चर्चा में आया था। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि करेरा थाना ज्वाइन करने से पहले करेरा विधायक के पास एक थार चारपहिया वाहन भी गिफ्ट में दिया गया। यदि आज भी उस थार वाहन के पेमेंट की परतें खोली जाएंगी तो उसका भुगतान खाकी के द्वारा ही किया गया मिलेगा।
करेरा के कमान संभालने के बाद थाना प्रभारी ने जमीनों के।मामलों में अपनी हिस्सेदारी शुरू कर दी। जिसका परिणाम यह है कि जमीन के जिन मामलों में सौदा पट नहीं पाता, उसमें टीआई करेरा निर्दोष को कूटरचित दस्तावेज का आरोपी बनाकर उसके खिलाफ गैर जमानती धाराओं में प्रकरण दर्ज कर लेते हैं। वो तो पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी इस बात को समझ गये कि लांच के फेर में टीआई ने खुद के लिए एक बड़ा गड्ढा खोद लिये है, इसलिए उन्होंने मामले को जांच के रोक लिया।
जिस वकील संजय सक्सेना की हत्या की गई, उन्होंने मरने से पहले पुलिस को बताया था कि मुझे जान से मारने की धमकी मिल रही हैं। टीआई साहब ने इस मामले में इसलिए दिलचस्पी नहीं ली, क्योंकि इसमें उन्हें कुछ नहीं मिल रहा था। अब जब वकील साहब की जान ही चली गई, तो टीआई को पहले से पता था कि वकील साहब ने किस से अपनी जान को खतरा बताया था, तो 24 की जगह 18 घंटे में आरोपी गिरफ्तार कर लिए। क्या पुलिस का यही असली चेहरा है, जिसमें मरने से पहले व्यक्ति चिल्ला रहा है कि मेरी जान लेने वाले घूम रहे हैं, और टीआई साहब उन मामलों में झूठे प्रकरण दर्ज कर रहे हैं, जिनमें उन्हें माल मिलने की उम्मीद है।
इस पूरे खेल में करेरा एसडीओपी आयुष जाखड़ (आईपीएस) सीधे सच्चे हैं, क्योंकि उन्हें ट्रेनिंग में अपराध ट्रेस करना सिखाया है, जमीन के मामलों के झूठे प्रकरण दर्ज करना तो टीआई छांवाई जैसे अधिकारी ही जानते हैं।






