
नगरपालिका में भ्रष्टाचार अधिनियम के बने आरोपी, 72 घंटे रहे अभिरक्षा व जेल में, फिर भी जिला शिक्षा केंद्र में कार्यरत
डीपीसी बोले: जिलाधीश के आदेश पर हमने कराया ज्वाइन, अफसोस: प्रशासन की जांच में ही बने थे आरोपी
शिवपुरी। नगरपालिका शिवपुरी में हुए भ्रष्टाचार की जांच में आरोपी बने जिला शिक्षा केंद्र के दोनों उपयंत्री बीते 7 फरवरी को वापस नौकरी में आ गए। महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों उपयंत्री संविदा पर कार्यरत होकर नगरपालिका में अटैच थे, लेकिन उन्हें विभाग में वापस लेने का आदेश प्रशासन के मुखिया ने ही दिया है।
कहते हैं कि यदि पकड़ ऊपर तक हो, तो उनके आगे नियम ताक पर रख दिए जाते हैं। ऐसा ही कुछ हुआ शिवपुरी नगरपालिका में शहर विकास के नाम पर हुए भ्रष्टाचार की शिकायत होने पर जब प्रशासन ने जांच करवाई थी, तो जिला शिक्षा केंद्र से नपा में अटैच सतीश निगम और जितेंद्र परिहार के खिलाफ कोतवाली में भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज हुआ था। जिसके बाद यह दोनों फरार हो गए, और पुलिस की टीम उत्तराखंड से गिरफ्तार करके लाई थी। एक दिन पुलिस अभिरक्षा में रहने के बाद न्यायालय ने उन्हें जेल भेज दिया था। जहाँ से दो दिन बाद उनकी जमानत हुई थी।
भ्रष्टाचार अधिनियम के मामले में आरोपी बनने और जेल में रहने के बाद भी बीते 7 फरवरी को जिला शिक्षा केंद्र में उन्हें पुनः ज्वाइनिंग दे दी गई।यह दोनों उपयंत्री संविदा कर्मचारी हैं, जिन्हें हर साल रिन्युअल कराना होता है। लेकिन इन कर्मचारियों की पकड़ मानें या गांधी जी का दम, उक्त दोनों उपयंत्री विभाग में वापस आ गए।
जब इस संबंध में डीपीसी दफेदार सिंह सिकरवार से पूछा तो उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार नगरपालिका में हुआ था, उनकी विभागीय जांच चल रही है, तब तक के लिए कलेक्टर के आदेश पर हमने ज्वाइनिंग दे दी है। इसमें बड़ा सवाल यह है कि जिस प्रशासन ने जांच में दोनों को दोषी पाया, उसी ने उन्हें फिर से ज्वाइनिंग दिलवा दी। सूत्रों का कहना है कि ऊपर से कोई फोन आया था, जिस पर यह नियमाविरुद्ध विभाग में वापस ले लिया।






