
मूल भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए वरदान साबित हुए विधायक, बनाए 106 विधायक प्रतिनिधि
करेरा मंडल कार्यकारिणी से लेकर अन्य सूची में जगह बना रहे थे आयातित कांग्रेसी, विधायक खटीक ने थमाए थोकबंद प्रमाण पत्र
शिवपुरी से सैमुअल दास:
भारतीय जनता पार्टी की जिला कार्यकारिणी से लेकर मंडल की सूचियों पर यदि गौर करेंगे, तो उसमें मूल भाजपाइयों को दरकिनार कर आयातित कांग्रेसियों के नाम अधिक हैं, जिससे मूल भाजपा कार्यकर्ता चिंतित व नाराज हैं। ऐसे हालातों से निपटने के लिए करेरा विधायक रमेश प्रसाद खटीक ने अलग फार्मूला निकाला, और 106 विधायक प्रतिनिधि बनाकर, उन्हें प्रमाण पत्र वितरित कर दिए। महत्वपूर्ण बात यह है कि विधायक ने जितने प्रतिनिधि बनाए हैं, उतने तो प्रशासन में विभाग ही नहीं होते, तो फिर क्या खदानों पर भी उन्होंने अपने प्रमाण पत्र वाले बिठा दिए हैं…?।
गौरतलब है कि एक तरफ प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री वर्सेस अन्य विधायक गुट बना हुआ है, तो वहीं शिवपुरी में गुटों का आंकड़ा तीन पर पहुंच गया। जिसमें एक तो मूल भाजपाई (जो अनदेखी का शिकार हैं), दूसरे आयातित कांग्रेसी (जो सभी सूचियों में काबिज हैं) तथा तीसरे तोमर (नरेंद्र सिंह तोमर) गुट के लोग हैं। चूंकि अभी समय सिंधियानिष्ठ भाजपाइयों का चल रहा है, इसलिए मूल भाजपाई तथा तोमर गुट हाशिए पर है। जिसके चलते बरसों से भाजपा का झंडा थामकर चलने वाले पुराने भाजपा कार्यकर्ताओं में बेहद नाराजगी है, लेकिन पार्टी के प्रोटोकॉल के तहत चुप हैं, वरना कांग्रेस जैसे (करेरा में हुआ था विरोध प्रदर्शन) कपड़े उतारकर प्रदर्शन करने लगते। ऐसे हालातों के बीच करेरा मंडल की जब सूची जारी हुई थी, तो स्थानीय विधायक रमेश खटीक के किसी भी नजदीकी या मूल भाजपाई को नहीं लिया गया। जिस पर विधायक ने भोपाल में आपत्ति दर्ज कराने की बात कही थी। शायद उनकी आपत्ति भी कोई रंग नहीं ला पाई, इसलिए उन्होंने 25-30 लोगों की सूची के विरुद्ध 106 विधायक प्रतिनिधि के प्रमाण पत्र बांट दिए। ऐसा करके विधायक ने अपने नजदीकियों एवं भाजपा के मूल कार्यकर्ताओं का भी सम्मान रख लिया। हालांकि कई बार फोन लगाने के बाद भी करेरा विधायक का फोन रिसीव नहीं हुआ।
दो विधायकों पर तोमर गुट का ठप्पा:
शिवपुरी जिले की दो विधानसभा करेरा एवं शिवपुरी के विधायकों पर नरेंद्र सिंह तोमर गुट का होने का ठप्पा लगा हुआ है। ऐसे में उनके लोगों को कार्यकारिणी में तबज्जों मिलने का सवाल ही नहीं उठता। शायद यही वजह है कि शहर में जब कोई कार्यक्रम होता है, तो उसमें आयातित ही नजर आते हैं, तथा यही हाल करेरा में रहता है।
नजदीकी होने के कितने फायदे
करेरा के भाजपा मंडल अध्यक्ष वीनस गोयल पर एक पहाड़ी को काटकर गायब करने तथा अपनी जमीनों के दाम बढ़ाए जाने पर कलेक्टर ने 54 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था। चूंकि वीनस भी आयातित होकर भाजपा मंडल अध्यक्ष बने, इसलिए उनकी कुर्सी भी कायम है, और जुर्माने का क्या होगा, यह तो भगवान जाने।






