
माइनिंग व खनन माफिया के बीच अघोषित सौदा: शासन की रेवेन्यू की चोरी के साथ प्रकृति को बड़ा नुकसान
ट्रकों में पत्थर लोड करके ट्रेक्टर ट्रॉली की काट रहे रसीद, जुर्माने में भी मिलती है बड़ी राहत, माइनिंग अधिकारी के दावे हवा में
शिवपुरी। जिले में माइनिंग विभाग और खनन माफिया के बीच अघोषित सौदा किया गया है, जिसमें शासन को तो रेवेन्यू की चपत लगा ही रहे हैं, साथ ही प्रकृति को बड़ा नुकसान पहुंचा रहे हैं।
ऐसे समझें पूरा मामला:
शिवपुरी की सतनबाड़ा क्षेत्र में बम्हारी के जंगल में चल रहीं पत्थर की अवैध खदानें फॉरेस्ट एरिया में काटी जा रही है। जिसमें लीजधारक निर्धारित जमीन को छोड़कर न केवल 1 से 2 किमी दूसरी जगह पर अवैध उत्खनन करके पत्थर निकाल रहे हैं, बल्कि माइनिंग विभाग द्वारा दी गई रॉयल्टी में खेल करके शासन को चूना लगा रहे हैं।
ऐसे समझें रॉयल्टी का खेल:
अवैध उत्खनन कर किए गए गहरे गड्ढों में से जो पत्थर निकाला जाता है, वो ट्रकों में लोड करके ले जाया जाता है। ट्रक में 18 टन पत्थर ढोया जाता है, लेकिन माफिया ट्रेक्टर ट्रॉली में 3 टन की रॉयल्टी रसीद काटते हैं। जिससे शासन को 15 टन कम माल की रॉयल्टी मिलती है। इसके अलावा लीजधारक जमीन से निकलने वाले पत्थर को कम दर्शाकर प्रकृति का अंधाधुंध दोहन कर रहे हैं।
जुर्माने में भी राहत
अवैध उत्खनन पर होने वाली कार्यवाही में जब रॉयल्टी रसीद के हिसाब से निकलने वाले पत्थर की काउंटिंग करते हैं। चूंकि रॉयल्टी 3 टन की काटते हैं, इसलिए खदान से निकलने वाला पत्थर कम दर्शाकर जुर्माने की राशि कम हो जाती है। यह पूरा खेल माइनिंग के जिम्मेदार खनन माफिया के साथ मिलकर खेल रहे हैं।
जिला माइनिंग अधिकारी के दावे हवा :
शिवपुरी के माइनिंग अधिकारी उईके का कहना था कि हम सेटेलाइट से नजर रखते हैं। जब यह नजर रखे हुए थे तो फिर स्वीकृत खदान की जगह से 2 किमी दूर जंगल में उत्खनन कैसे हो रहा है।माइनिंग अधिकारी के रूप में भले ही यूईके का नाम है, लेकिन विभाग में पूरा खेल मानचित्रकार सोनू श्रीवास खेल रहे हैं। अब वो पूर्व में बंद हुई खदानों को फिर से शुरू करने की तैयारी में है।








