
केंद्र सरकार के बजट का बाजार में दिख रहा असर, स्टॉकिस्ट कर रहे कालाबाजारी, कोरोना की याद फिर हुई ताजा
गुटखा पाउच व सिगरेट बेच रहे प्रिंट रेट से अधिक दाम में, 33 रुपए की पुड़िया 45 रुपए में
शिवपुरी। केंद्र सरकार ने बजट में आमजन को भले ही कुछ खास न दिया हो, लेकिन गुटखा-पाऊंच ईवी सिगरेट पर बढ़ाए गया दाम से कालाबाजरी बढ़ गई। स्टॉकिस्ट ने पुराना माल रोक लिया, और उसे नए रेट में मनमाने दाम पर आम उपभोक्ता को बेच रहे हैं । वर्तमान में जो हालात बने हैं, उन्होंने कोरोना संक्रमण काल की याद दिला दी।
शिवपुरी के बस स्टेंड पर एक युवक ने राजश्री का पाउच 45 रुपए में खरीदा, जबकि उस पर प्रिंट रेट 33 रुपए अंकित है। यानि निर्धारित रेट से 12 रुपए अधिक दाम में पाउच बेचा जा रहा है। केंद्र सरकार ने जब अपने बजट में तम्बाखूं उत्पादों के दाम बढ़ाए थे, तो थोक व्यापारियों ने माल रोक लिया। चूंकि वो माल पुराना है, तो उस प्रिंट रेट भी पुरानी ही डली हुई है, लेकिन स्टॉकिस्ट ने उसे मनमाने रेट पर बेचना शुरू कर दिया। 20 रुपए प्रिंट वाली पुड़िया 25 में खरीद रहे हैं।
चूंकि गुटखा पाउच की बिक्री बहुत अधिक है, तथा अब इसे पुरुषों के अलावा महिलाएं भी खा रही हैं। ऐसे में बाजार में बढ़ती मांग को देखते हुए थोक व्यापारियों ने अपने रेट निर्धारित करके मोटा मुनाफा कमाना शुरू कर दिया। बस स्टेंड के दुकानदार शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि उक्त तम्बाखू उत्पादों पर पहले जीएसटी 28 प्रतिशत थी, जिसे बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी है। उसके हिसाब से एक पैकेट पर 15 से रुपए तक बढ़ना चाहिए थे, लेकिन स्टॉकिस्ट ने 100 से 150 रुपए बढ़ा कर आमजन के जेब काटना शुरू कर दिया। नियमानुसार कोई भी सामान प्रिंट रेट से अधिक दाम में बेचा नहीं जा सकता, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर स्टॉकिस्ट खुलेआम मनमाने दाम वसूल रहे हैं।
ज्ञात रहे कि ऐसा ही कुछ कोरोना संक्रमण काल के दौरान हुआ था, तथा स्टॉकिस्टों ने कई गुना अधिक रेट में माल बेचकर रातोंरात लाखों का मुनाफा कमाया था। उस दौरान भरे आमजन की जेब कटी थी, और आज भी आमजन ही प्रिंट रेट से अधिक दाम में उक्त सामग्री खरीदने को मजबूर है।






