
कलेक्टर ने उजागर किया करेरा का बड़ा जमीन घोटाला, नायब तहसीलदार सहित 7 शासकीय कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार अधिनियम का मामला दर्ज
SD News ने उठाया था मामला:::
डॉ. श्वेता शर्मा ने की थी शिकायत: जब परतें खुलीं तो अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक संलिप्त मिले जमीन घोटाले में
शिवपुरी। जिले की करेरा तहसील में चल रहे भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए डॉ. श्वेता शर्मा ने कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी से की थी। इस मामले की जांच डिप्टी कलेक्टर शिवदयाल धाकड़ ने की, तो उसमें अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक जमीन घोटाले में आरोपी बन गए। कलेक्टर की जांच रिपोर्ट के आधार पर दिनारा थाना पुलिस ने नायब तहसीलदार सहित 7 शासकीय कर्मचारियों के खिलाफ गैर जमानती धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया। महत्वपूर्ण बात यह है कि मामला दर्ज करने के बाद भी दिनारा पुलिस आरोपियों के नाम बताने से परहेज करती रही।
डिप्टी कलेक्टर एसडी धाकड़ ने जांच में पाया कि नायब तहसीलदार अशोक श्रीवास्तव, रीडर लोकेंद्र श्रीवास्तव, पटवारी बृजेश यादव, जीवनलाल तिवारी सहायक ग्रेड बाबू सेवानिवृत्त, प्रताप पुरी बाबू, दिवंगत लालाराम बाबू एवं दिवंगत मुकेश चौधरी पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम की गैर जमानती धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया
उक्त आरोपियों ने मिलकर शासकीय जमीन का सर्वे नंबर बदलकर उसे प्राइवेट बनाकर बीघा के रूप में बेच दी थी। ऐसा एक जगह नहीं, बल्कि उक्त शासकीय जमीन को स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अलावा आरोपी बने रीडर ने भी अपने भाई के नाम जमीन दिलवाकर एक कॉलोनाइजर को बेचकर मोटा माल कमाया।
ऐसे खुला मामला:
डॉ. श्वेता शर्मा ने जरगवा गांव में 4 बीघा जमीन खरीदी थी, जिसकी रजिस्ट्री व नामांतरण होने के बाद श्वेता ने उक्त जमीन उमेश गुप्ता को बेची, तो उनकी भी रजिस्ट्री और नामांतरण हो गया। गुप्ता ने जब उक्त जमीन अधिक दाम में बेचने के लिए ग्राहक ढूंढा, तो पटवारी बृजेश यादव ने कथित तौर पर अपना हिस्सा मांगा। जब गुप्ता ने हिस्सा देने से मना किया तो रीडर लोकेंद्र श्रीवास्तव के साथ मिलकर पटवारी ने ऑनलाइन नजर आ रहे गुप्ता के नामांतरण को गायब कर दिया। इतना ही नहीं उक्त जमीन को विक्रय से वर्जित भी लिख दिया। रिकॉर्ड में हेराफेरी करने की शिकायत डॉ. श्वेता शर्मा ने कलेक्टर से की थी।
करेरा टीआई भी बन गए थे राजस्व अधिकारी
इस मामले की एक शिकायत उमेश गुप्ता ने करेरा थाने में की थी। करेरा टीआई विनोद छावई पहले तो डॉक्टर दंपत्ति पर पैसा वापस करने का दवाब बनाया। लेकिन जब उनके प्रयास सफल नहीं हुए तो उन्होंने उस शिकायतकर्ता डॉ. श्वेता के खिलाफ गैर जमानती धाराओं में मामला दर्ज कर लिया, जिसकी शिकायत पर 7 सरकारी कर्मचारी आरोपी बने। नियमानुसार राजसी विभाग की जांच के बाद पुलिस मामला दर्ज करती है, जैसे बीती रात दिनारा थाने में प्रकरण दर्ज हुआ।गांधी जी की चाहत में करेरा टीआई छावई खुद ही राजस्व अधिकारी बन गए, और बिना जांच के मामला दर्ज कर लिया। हालांकि अब डॉ. श्वेता शर्मा का नाम हटाकर उक्त 7 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया जाएगा।








