
कहीं शिवपुरी में भी न बन जाएं इंदौर जैसे हालात, सिद्धेश्वर के सामने सीवर चेंबर के पास से हो रही पानी की सप्लाई
पानी के कैंपरों से सुरक्षित हैं शहरवासी, अन्यथा नगरपालिका ने नहीं रख छोड़ी है कोई कसर, पानी के बार के पास कच्चा शौचालय
शिवपुरी। देश के सबसे साफ सुथरे शहर इंदौर में दूषित पानी के पीने से 16 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इतना ही नहीं दिल्ली में भी पीने के पानी में सीवर की गंदगी मिल जाने से आधा दर्जन लोगों को पेट की गंभीर बीमारी होने के साथ उनकी भी बमुश्किल जान बच पाई। दूषित पानी की समस्या से शिवपुरी शहर भी अछूता नहीं है।
शहर के सिद्धेश्वर मंदिर के सामने स्थित कॉलोनी में जिस कुएं वाले नपा के ट्यूबल से पानी की सप्लाई होती हैं, उसके नजदीक ही एक घर का सीवर चेंबर बना हुआ है, जबकि 5 फीट दूरी पर ही कच्चा शौचालय भी उपयोग किया जा रहा है।
स्वच्छ भारत अभियान से पहले हो देश में कच्चे शौचालय और सिर पर सीवर की गंदगी ढोने की प्रथा खत्म हो चुकी है। अब यदि कहीं पर भी कच्चा शौचालय उपयोग हो रहा है, तो वो एक सामाजिक अपराध की श्रेणी में आता है, लेकिन सिद्धेश्वर के सामने कॉलोनी में एक पूर्व पार्षद के घर में भी कच्चा शौचालय का उपयोग किया जा रहा है। इस कच्चे शौचालय या सीवर के चेंबर से होकर गंदगी बोर वाले कुएं में पहुंच गई तो इस कॉलोनी में भी इंदौर जैसे हालात बन जाएंगे।
हालांकि शहर में कई जगह सीवर की गंदगी जिन नलों में से होकर बह रही है, उसी में से होकर पानी की पाइप लाइन भी डाली गई है। डिस्ट्रीब्यूशन लाइन में लीकेज होने से पानी की सप्लाई में सीवर की गंदगी मिलने की आशंका बनी हुई है। वो तो शहर के अधिकांश घरों में पानी के प्राइवेट कैम्पर मंगवाए जाते हैं, अन्यथा नगरपालिका के जिम्मेदारों ने तो कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। शुक्रवार को सीएमओ ने एक पत्र भी जारी किया है कि इतने दिनों से बंद सिंध की सप्लाई जब शुरू होगी, तो शुरुआती पानी नाली में बहा देना, क्योंकि बंद लाइन के लीकेज से सीवर की गंदगी पाइप में पहुंच गई होगी।
नेताओं के सिर चढ़कर बोल रहा सत्ता का नशा
एक तरफ जहां लोग दूषित पानी पेकर मर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार नेता सत्ता के मद में चूर हैं। बीते रोज इंदौर में हुई मौतों के सवाल पर नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का अभद्र जवाब, उनकी जनता के प्रति लापरवाही को दर्शाता है। नेताओं और अधिकारियों के बंगलों पर तो साफ शुद्ध पानी पहुंचता है, इसलिए उन्हें जनता के दर्द का अहसास नहीं है।







