
कागज के टुकड़े पर शिवपुरी में आया मेडिकल कॉलेज बना अखाड़ा, पेशेवर डॉक्टरों की शह पर मेडिकल स्टूडेंट्स ने बनाया इलाके में खौफ
कोरोना में हुईं थोकबंद मौत, भर्ती में फर्जीवाड़ा विस में गूंजा, डॉक्टर चला रहे दुकानें
शिवपुरी। जब केंद्र में कांग्रेस गठबंधन की सरकार थी, गुलाम नबी आजाद केंद्रीय चिकित्सा मंत्री थे, तब ज्योतिरादित्य सिंधिया मेडिकल कॉलेज का स्वीकृति पत्र लाए थे। वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव इसी मुद्दे पर भाजपा ने लड़ा था कि यहां के सांसद कागज के टुकड़े पर मेडिकल कॉलेज का दावा कर रहे हैं। उस चुनाव में गांधी पार्क में हुई भाजपा की सभा में पीएम कैंडीडेट नरेंद्र मोदी ने कागज के पर्चे पर मेडिकल कॉलेज का जिक्र अपने भाषण में किया था। सिंधिया कांग्रेस से चुनाव जीते, केंद्र में भाजपा की सरकार बनी, फिर भी शिवपुरी में मेडिकल कॉलेज बना, जिसमें उनकी बुआ तथा तत्कालीन केबिनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने भी सहयोग किया।
मेडिकल कॉलेज की बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई, तथा वर्ष 2021 में जब कोरोना का सबसे खतरनाक संक्रमण काल आया, तब मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाएं शुरू की गईं, लेकिन व्यवस्था ठीक न होने से इसमें थोकबंद मौत हुईं, क्योंकि आसपास लाश देखकर लोग डर कर मर रहे थे। मौत की वजह यह भी रही, क्योंकि कोरोना मरीज के साथ अटेंडर पर रोक थी, तथा मरीज का गला सूखने पर उसे पानी पिलाने को स्टाफ नहीं था। उसके बाद मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर तो बढ़े, लेकिन उस करोड़ों की बिल्डिंग में इलाज मिलने की बजाए वहां के डॉक्टरों के बाजार में खुले क्लीनिकों पर मिल रहा है।
वर्तमान में यह मेडिकल कॉलेज अखाड़ा बना हुआ है, तथा प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले कुछ डॉक्टरों की शह पर मेडिकल स्टूडेंट्स का आसपास इलाके में खौफ बना हुआ है। सोमवार को मेडिकल के छात्रों ने इस बात पर मारपीट कर दी कि एक युवक ने कुर्सी पर रखा कोट हटाने को कह दिया। छात्रों ने कार का कांच भी फोड़ दिया, तथा बाईकों से कार का पाम पार्क तक पीछा किया।
डीन ने मांगी माफी, छात्रों पर कंट्रोल का आश्वासन
सोमवार को मीडियाकर्मियों ने कलेक्टर को मेडिकल कॉलेज के खिलाफ ज्ञापन दिया। किस पर शाम 5 बजे कलेक्ट्रेट में डीन डॉ. परमहंस सहित अन्य डॉक्टर एवं कलेक्टर रविंद्र चौधरी व एसपी अमन सिंह राठौड़ के साथ मीडिया की बैठक हुई। जिसमें डीन ने माफी मांगी, तथा छात्रों को कंट्रोल करने का आश्वासन दिया।







