
जिसने नपाध्यक्ष के नाम पर लगाई थी मुहर, अब वो लड़ रहे हटाने की लड़ाई, नहीं हो रही सुनवाई
बोले पार्षद: जिन नेताओं ने दिया था भरोसा, ऊपर उनकी ही नहीं चली, अब न्यायालय का सहारा
शिवपुरी। नगरपालिका शिवपुरी की अध्यक्ष गायत्री शर्मा को कुर्सी से हटाने के लिए जो पार्षद लामबंद हैं, उनमें एक शख्स वो भी है, जिसने नाम पर सहमति जताई थी। इतना ही नहीं, इनमें कुछ पार्षद ऐसे भी हैं, जो कुछ समय तक तो दीदी के साथ सुबह-शाम की चाय पी रहे थे, लेकिन अब वो भी कहने लगे कि इन्हें हटाओ। पिछले 5 माह से अध्यक्ष को हटाने की लड़ाई लड़ रहे पार्षदों में से अब फिफ्टी परसेंट भी नहीं बचे, और जो हैं वो भी नेताओं के आश्वासन में आकर अपने हाथ कटवाने के बाद अब न्यायालय की शरण में पहुंच गए।
जिस नगरपालिका की जिम्मेदारी शहर विकास की है, वो पिछले 5 माह से युद्ध का अखाड़ा बनी हुई है। नपा में चल रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ पार्षदों ने अब नपा परिसर में ही टेंट लगाकर धरना शुरू कर दिया। विरोधी पार्षदों में शामिल नपा उपाध्यक्ष पति रामजी व्यास ने ही पूर्व केबिनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के सामने गायत्री शर्मा के नाम पर सहमति जताई थी। जबकि इस दौरान पार्षद सरोज धाकड़ और नीलम बघेल का नाम भी चला था।
रातोरात हुए फैसले ने गायत्री शर्मा को जब शहर का प्रथम नागरिक बनाया, तो कुछ पार्षद उनके बहुत नजदीकी बन गए थे, जिसमें तारा राठौर, गौरव सिंघल आदि शामिल हैं। शहर के 39 वार्डों के पार्षद में से कुछ को पीआईसी में शामिल कर या अपना नजदीकी बनाकर 6 माह तक उनके वार्ड में काम की सुनवाई होती है।फिर अगली टाइमिंग में दूसरे 5- 6 पार्षद नजदीकी बन जाते हैं, जिससे पांच साल के कार्यकाल में सभी 39 पार्षदों को नजदीकी बनकर वार्ड में काम और जेब में दाम दोनों ही मिल जाते थे। इस बार भी कुछ ऐसा ही पार्षदों ने सोचा और दीदी के साथ जुड़े रहे, लेकिन जीजा ने जब अपना असली रूप दिखाया तो यह पार्षद विरोधी खेमे न3 जाकर खड़े हो गए।
छले गए पार्षद, किसी ने नहीं सुनी
करेरा बगीचा सरकार पर कसम खाकर आए पार्षदों का शुरुआती विरोध देखकर लग रहा था कि परिणाम जल्दी आएगा। अविश्वास प्रस्ताव का आवेदन देते ही प्रभारी मंत्री से लेकर भाजपा जिलाध्यक्ष सहित प्रशासन भी समझाने में जुट गया। झूठे आश्वासन देकर नेताओं ने अविश्वास का आवेदन वापस करवाने के बाद पार्षदों को अपने हाल पर छोड़ दिया। जनता के बीच शहर के बाजार में धरना देने के लिए पार्षदों को प्रशासन ने परमीशन नहीं दी, तो फिर मजबूरी में नपा परिसर में ही टेंट लगाना पड़ा।
क्या नुकसान के बाद समझेंगे सच्चाई..?
नपा शिवपुरी में खुला भ्रष्टाचार हुआ, यह सभी आरोप अभी तक हुई प्रशासनिक जांच में प्रमाणित हो चुके हैं। पार्षदों के बाद अब पूरा शहर ही अध्यक्ष के खिलाफ खड़ा हो गया है। जिला एवं हाईकोर्ट ग्वालियर से जारी हुए जमानत निरस्ती के आदेश में भी नपाध्यक्ष, सीएमओ व ईई की संलिप्तता भ्रष्टाचार अधिनियम के दर्ज मामले में मानी है। इतना सब होने के बाद भी अध्यक्ष अपनी कुर्सी पर जिन केंद्रीय मंत्री के कथित संरक्षण में बची हुई हैं, उन मंत्री को शहर की जनता का रुख समझ नहीं आ रहा क्या?, वो कब तक अपने नजदीकी चाटुकारों की झूठी बातों को सच मानते रहेंगे?, याद रहे कि उनकी बुआ की नैया भी उनके चंद नजदीकी चाटुकारों ने डुबो दी, वरना वो शिवपुरी से केपी को और भी बड़े अंतर से हरातीं।







