March 5, 2026
इंसान की जान सस्ती हो गई, या फिर कानून का खौफ कम हो गया..?, संरक्षण या बेकाबू होते हालात

इंसान की जान सस्ती हो गई, या फिर कानून का खौफ कम हो गया..?, संरक्षण या बेकाबू होते हालात
मामा के यहां आया था होली मनाने, एक दिन पहले मिली मौत, दाग में नहीं गया मामा, जीवन भर का लगा दाग

शिवपुरी। जिले में पिछले एक पखवाड़े में घटित हुए घटनाक्रमों पर नजर डाली जाए तो ऐसे गम्भीर वारदात सामने आई हैं कि लोगों की रूह कांप जाए। सरेराह वकील को गोली मारने से शुरू हुए घटनाक्रम होली से एक दिन पूर्व जिंदा युवक पर ट्रेक्टर चढ़ाकर जान लेने की घटना ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए। इन मामलों में जमीन के विवाद एक बड़ा कारण बन रहे हैं, जबकि घटना के बाद परिणाम शून्य ही आता है।
सिरसौद थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कुंअरपुर में रहने वाला 20 वर्षीय इकलौता बेटा अभिषेक रावत अपने मामा के घर होली मनाने 4 किमी दूर बसई गांव आया था। उसे क्या पता था कि यहां छोटे से विवाद में उसे जिंदा ही ट्रेक्टर से कुचलकर मार दिया जाएगा। अभिषेक के अंतिम संस्कार में उसका माना शामिल नहीं हुआ, क्योंकि उसके घर आया भांजा हमेशा के लिए दुनिया छोड़ गया। आज जब हर तरफ होली का जश्न है तो अभिषेक के घर जीवन भर के मिले दर्द का मातम पसरा है।
जिले में इस तरह की घटनाओं का सिलसिला करेरा में वकील संजय सक्सेना की दिनदहाड़े गोली मारकर की गई हत्या से शुरू हुआ। इसके बाद मायापुर में एक विवाहिता महिला की उसके घर में ही हत्या कर दी गई। चार दिन पूर्व अमोला के सिरसौद में महिला रानी सेन को उसके पड़ोसी सुघर सिंह लोधी ने पेट में दो गोली मारकर उसकी जान ले ली। इधर होली से एक दिन पूर्व सिरसौद के बसई गांव में इकलौते बेटे अभिषेक को ट्रेक्टर से रौंद दिया।
इन सभी मामलों में से वकील की हत्या में जरूर पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई थी। क्योंकि जिसे अंधा कत्ल माना जा रहा था, उसकी जानकारी वकील व उसके परिजनों के अलावा पुलिस को भी थी। जबकि अन्य मामलों में मामूली विवाद ही इतना बढ़ गया कि लोगों की जान तक ले ली।
सूत्रों की माने तो सिरसौद-पोहरी क्षेत्र के कुछ गांव में अलग अलग वर्ग के लोगों का दबदबा है। लेकिन पिछले कुछ समय से आसपास के गांव में रहने वाले एक वर्ग विशेष के लोग एकजुट होकर अन्य लोगों पर हावी होने लगे हैं। जबकि हर घटना के परिणाम पर यदि गौर करेंगे, तो मरने वाला दुनिया छोड़ गया, मारने वाले और सुपारी देने वाले जेल गए, जमीन मौके पर ही रह गई।

जल्द सुलझाने होंगे जमीनों के मामले

जिले में जमीनों का खेल कुछ इस तरह खेला जा रहा है कि राजस्व विभाग के पटवारी, आरआई से लेकर नायब तहसीलदार तक रिश्वत में पैसा और प्लॉट मांगने लगे हैं। जमीनों में हो रही गड़बड़ियों की शिकायतें करने के बाद भी जांच के नाम पर।उनको महीनों तक लटका दिया जाता है, जबकि इस बीच में कोई न कोई बड़ी घटना हो जाती है।

इंसान की जान सस्ती हो गई, या फिर कानून का खौफ कम हो गया..?, संरक्षण या बेकाबू होते हालात

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page