
गांधीजी से अथाह प्रेम: शहर लूटने वाले अब आपस में ही उलझ रहे, माल कमाने के लिए इज्जत भी रखी ताक पर
शिवपुरी में दोनों प्रोजेक्ट बने चारागाह: सीवर को निपटा रही पीएचई, सिंध जलावर्धन को निपटा रही नगरपालिका, जीजा का पावर
शिवपुरी। संगठित होकर शहर को लूटने वाले गिरोह में पिछले दिनों कहासुनी से लेकर माराकुट्टी भी हो गई। माल कमाने के फेर में अधिकारी-क्मचारी अपनी इज्जत को खूंटी पर टांगकर आए हैं। सुना है कि जीजाजी ने फिर पवार दिखा दी। बंद कमरे की जब यह बात बाहर आई, तो फिर अपनी बेइज्जती करवाने वाले एक-एक करके फोन लगाकर यह कह रहे हैं कि मैं तो नहीं था, दूसरा होगा कोई।
शिवपुरी शहर को बर्बाद करने वाले सीवर प्रोजेक्ट और सिंध जलावर्धन योजना का लाभ जनता को भले ही न मिला हो, लेकिन निर्माण एजेंसियों के लिए यह चारागाह बने हुए हैं। सीवर प्रोजेक्ट का अभी एक भी चरण पूरा नहीं हुआ, तो फिर जनता के लाभ का सवाल ही नहीं उठता, लेकिन इस प्रोजेक्ट में पीएचई के पूर्व ईई के खिलाफ लोकायुक्त में मामला दर्ज हो चुका है, जिसमें बिना काम किए करोड़ों का भुगतान किया गया था।
ठीक उसी तरह सिंध जलावर्धन योजना भी नपा के अधिकारे-कर्मचारियो के लिए चारागाह बनी हुई है। सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों हुए किसी काम का ठेका सभी की रजामंदी से नहीं हुआ, तो भुगतान में कोई पेंच फंसा दिया था। इसी बात पर जीजा ने नपा के तुर्रमखा बनने वाले अधिकारियों की भी इतनी बेइज्जती कर दी कि उसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता।
खैर शहर तो मिल जुलकर लूटना है, इसलिए गाली गलौज और मारपीट के बाद भी गांधीजी गिनने के लिए सभी गिले शिकवे भूल जाते हैं। यह गिरोह शहर विकास के लिए आई राशि को हड़पने के लिए केलकुलेटर पर बकायदा हिस्से का प्रतिशत तय किया जाता है। उसमें अगर ऊपर नीचे हो गई, तो फिर इसी तरह की बेइज्जती भी झेलते हैं।
जीजा सोच रहे, दीदी हो गईं फ्री
कर्ण बताओं नोटिस के बाद पेशी होने के बाद अभी तक कोई रिजल्ट सामने न आने पर जीजा सोच रहा है कि दीदी तो फ्री होकर बच गई। लेकिन वो यह भूल रहे हैं कि नगरीय प्रशासन भले ही गांधीजी की सुनता हो, लेकिन न्यायपालिका किसी की नहीं सुनती।






