March 28, 2026
फॉरेस्ट अपना प्लांटेशन नहीं बचा पाया, तो जंगल क्या खाक बचाएगा?, 400 हरे-भरे पेड़ों को बना दिया ठूंठ

फॉरेस्ट अपना प्लांटेशन नहीं बचा पाया, तो जंगल क्या खाक बचाएगा?, 400 हरे-भरे पेड़ों को बना दिया ठूंठ
डीएफओ बोले: जमीन राजस्व की है, प्लांटेशन हमारा है, निगरानी के लिए कोई कर्मचारी नहीं

शिवपुरी। पेड़ हमें जीवनदायिनी ऑक्सीजन देते हैं, और कोरोना संक्रमण काल में ऑक्सीजन के बिना कई लोगों की जान चली गई थी। पौधे से पेड़ बनने में समय लगता है, और यदि वो प्लांटेशन खुद फॉरेस्ट ने किया हो, तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी विभाग की और भी अधिक बढ़ जाती है। शिवपुरी जिले के सिरसौद में फॉरेस्ट द्वारा किए गए प्लांटेशन के 13 साल आयु वाले लगभग 400 हरे-भरे पेड़ों को जंगल माफिया ने काट दिया। डीएफओ सुधांशु यादव का कहना है कि प्लांटेशन फॉरेस्ट ने किया, लेकिन जमीन राजस्व की है। वहां पर चौकीदार न होने की वजह से कुछ पेड़ों को काटा गया है, जिसे हम फिर से जांच में ले रहे हैं।
शिवपुरी के वयोवृद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनारी प्रेमनारायण नागर कहते हैं कि यदि जंगल को बचाना है, तो फॉरेस्ट विभाग को खत्म कर दो। उनकी यह बात सिरसौद में नष्ट किए ऑक्सीजन प्लांट को देखकर सही लगती है। सिरसौद में राजस्व की 65 बीघा भूमि पर वर्ष 2011-12 में 21070 पौधे लगाकर प्लांटेशन वन विभाग ने किया था। जिसमें से लगभग 50 फीसदी पौधे 13 साल पुराने पेड़ बन गए थे। पिछले दिनों प्लांटेशन में लगे लगभग 400 पेड़ों को काटकर जंगल माफिया लकड़ी लेकर रफूचक्कर हो गया। जंगल माफिया ने पेड़ काटकर जमीन को खाली कर दिया, और अब उस पर प्रभावशाली भूमाफिया कब्जा करके खेती करने की तैयारी करेगा।

कई प्लांटेशन उजाड़कर हो रही खेती

शिवपुरी से नरवर जाते समय कई जगह फॉरेस्ट की जमीन पर किए गए प्लांटेशन को वन विभाग की सांठगांठ से उजाड़ दिया गया, तथा उस पर बेरोकटोक खेती की जा रही है। ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि जब वन विभाग अपने ही प्लांटेशन की सुरक्षा नहीं कर पा रहा, तो फिर जंगल को बचाने की उम्मीद करना बेमानी ही है।

बोले डीएफओ: हम पुनः जांच करवा रहे

वो राजस्व की जमीन है, जिस पर वन विभाग ने प्लांटेशन किया था। चूंकि उसके आसपास फॉरेस्ट या जंगल नहीं है, इसलिए पौधे से पेड़ बनने तक तो निगरानी की गई, फिर वहां कोई कर्मचारी तैनात नहीं रहा। इसलिए कुछ पेड़ काटे गए हैं, जिसकी हम पुनः जांच करवा रहे हैं। सागवान के जो पेड़ काटे गए हैं, वो बांस बल्ली की चौड़ाई के हैं, उनसे फर्नीचर नहीं बनाया जा सकता।
सुधांशु यादव, डीएफओ, शिवपुरी

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