February 28, 2026
भ्रष्टाचार का गढ़ बनी करेरा तहसील में हालात हुए बेकाबू, राजस्व अमला मनमानी पर उतारू

भ्रष्टाचार का गढ़ बनी करेरा तहसील में हालात हुए बेकाबू, राजस्व अमला मनमानी पर उतारू
कलेक्टर से की थी 4 माह पूर्व तथ्यों के साथ की थी शिकायत, जांच के नाम पर लटकाए रहे मामला, अब स्थिति नियंत्रण के बाहर

शिवपुरी। जिले की करेरा तहसील पिछले लंबे समय से भ्रष्टाचार का गढ़ बनी हुई है। यहां पदस्थ अधिकारी से लेकर बाबू काम के बदले रिश्वत और जमीन में प्लॉट वसूलते हैं। यह लोग सरकारी दफ्तर में बैठकर काम आमजन के लिए न करके स्थानीय नेताओं के लिए जमीन कारोबार कर रहे हैं। हालात इतने बिगड़ने के पीछे कहीं न कहीं कलेक्टर की लचर कार्यप्रणाली भी एक बड़ी वजह बनी हुई है।
करेरा तहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार अशोक श्रीवास्तव पहले दिनारा में आरआई रहे और फिर नायब तहसीलदार बन गए। उनके रीडर लोकेंद्र श्रीवास्तव तो इतने कलाकार हैं कि कंप्यूटर में ऑनलाइन रिकॉर्ड को भी गायब कर देते हैं। लोकेंद्र का ट्रांसफर पिछोर हुआ था, लेकिन बताते है कि विधायक ने ट्रांसफर निरस्त करवा दिया। इस टीम का तीसरा खिलाड़ी जरगांवा-थनरा का पटवारी बृजेश है। यह तिकड़ी संयुक्त रूप से काम करती है, और जमीन के बड़े हेरफेर करने में भी नहीं चूकती। बीते रोज एक रिटायर्ड फौजी तहसील के सिस्टम से इतना आहत हो गया कि उसने अपने मासूम बच्चों सहित परिजनों पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया।

कलेक्टर नहीं करवा पाए 4 माह में जांच

बीते नवंबर 2025 को जरगवा गांव के रिकॉर्ड को बदलने की प्रमाणित शिकायत कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी से की थी। शिकायत के दस्तावेज देखकर कलेक्टर ने कहा था कि मैं 7 दिन में इसकी जांच करवाकर दोषियों को दंडित करूंगा। इसी इंतजार में 4 माह गुजर गए, कलेक्टर की जांच तो पूरी नहीं हो पाई, लेकिन इस दौरान करेरा टीआई ने पहले पैसे वापस कराने के लिए दवाब बनाया, और फिर अवैधानिक रूप से बिना जांच करे शिकायतकर्ता के खिलाफ गैर जमानती धाराओं में मामला दर्ज कर लिया। महत्वपूर्ण बात यह है कि कलेक्टर की जांच अभी तक नहीं हो सकी।

तहसील में तालाबंदी किसने करवाई?

सिस्टम से परेशान होकर जिस फौजी को आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा, उसके खिलाफ ही तहसील के लोगों ने मामला दर्ज करवा दिया। इतना ही नहीं, शुक्रवार को तहसील के सभी कमरों में तालाबंदी करके कर्मचारी हड़ताल पर बैठ गए। क्योंकि उनकी कारगुजारियां लोगों के सामने आ गई। करेरा एसडीएम भी इस मामले में तहसील के भ्रष्ट स्टाफ को बचाने में लगे हुए हैं।

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