
भारत में 38 चीते, इनमें से 35 श्योपुर के कूनो में, शिवपुरी में नजर नहीं आ रहे सैलानियों को टाइगर
चीतों को रास आया कूनो का जंगल, तेजी से बढ़ रही आबादी, माधव टाइगर रिजर्व में एकांत जंगल बहुत कम
शिवपुरी। बिल्ली की चीता प्रजाति भारत में पहली बार कूनो (श्योपुर) में 2022 में बसाई गई। जबकि 2023 में शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व में टाइगर लाए गए। शिवपुरी में अभी तक महज दो टाइगर ही बढ़े हैं, तथा एक मादा लापता है, जबकि कूनो में 28 चीतों की वृद्धि हुई, जिसमें से 10 मृत हुए हैं। भारत में वर्तमान में 38 चीते हैं, जिनमें से 35 अकेले कूनो में ही हैं। बीते बुधवार को गामिनी चीता ने 3 शावकों को जन्म दिया है, तथा वो दूसरी बार माँ बनी है।
ज्ञात रहे कि 17 सितंबर 2022 को श्योपुर के कूनो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफ्रीका के नामीबिया से लाए गए 8 चीतों (5 मादा व 3 नर) को छोड़ा था। उसके बाद फरवरी 2023 में 12 चीते फिर अफ्रीका से लाकर छोड़े गए थे। चीतों को कूनो का जंगल कुछ ऐसा रास आया कि 4 साल में ही चीतों का कुनबा 48 तक पहुंच गया था। हालांकि जब चीतों का पहला सीजन आया तो उनकी मौत होने से पूरे प्रोजेक्ट पर ही सवाल खड़े होने लगे थे। हालांकि फिर मौतों पर ब्रेक लगकर आबादी में बढ़ोत्तरी हुई। अभी तक 10 चीतों की मौत हो चुकी है, जिसमें से 6 (3 शावक व 3 वयस्क) वर्ष 2025 में ही मृत हुए। बावजूद इसके चीतों का बर्थ रेशों टाइगर से बहुत अधिक है। बताते हैं कि वर्ष 1952 में भारत में चीतों को विलुप्त माना था, यानि उसके पहले चीते भारत में थे।
माधव टाइगर रिजर्व में अभी तक 6 टाइगर लाए गए, जिनमें से एक मादा टाइगर का शिकार करने वाला शिकारी पकड़ा जा चुका है, लेकिन प्रबंधन उसे अभी भी लापता मान रहा है। इस बीच में महज 2 शावकों के जन्म के फोटो एक साल पहले प्रबंधन ने जारी किए थे। माधव टाइगर रिजर्व में भले ही सैलानियों को टिकिट लेने के बाद भी टाइगर नहीं दिखे हों, लेकिन शिवपुरी के ग्रामीणों ने अपने खेतों में मादा टाइगर को असानी से देखा है, जिसे ट्रेंकुलाइज करके वापस ले जाया गया। माधव टाइगर रिजर्व के अंदर बसे 5 गांव अभी तक खाली नहीं हो पाए, इसके अलावा और भी डिस्टर्बेंस मौजूद हैं, जिसकी वजह से आबादी बढ़ने में रुकावटें आ रही हैं।






