
औसत से दोगुनी बारिश होने के बाद भी मार्च में ही शिवपुरी जिले में जल अकाल घोषित
जल संरक्षण के प्रोजेक्टों पर अरबों रुपए खर्च होने के बाद भी पानी की किल्लत, निजी नलकूप खनन पर प्रतिबंध
शिवपुरी। बीते वर्ष बारिश के मौसम में शिवपुरी जिले में औसत सामान्य बारिश 816.3 मिमी से लगभग दोगुनी बारिश दर्ज की गई थी। बावजूद इसके मार्च माह आधा गुजरते ही शिवपुरी में जल अकाल घोषित कर दिया गया। इसकी मुख्य वजह यह है कि बारिश के पानी को संरक्षित करने वाले तालाब व अन्य संरचनाओं पर कब्जे होने की वजह से उन्हें सर्दियों में ही खाली कर दिया गया। इतना ही वाटरशेड में लगभग 2 अरब रुपए की राशि खर्च कर तालाब व स्टॉपडेम बनाए गए, लेकिन वो धरातल पर कम और कागजों में अधिक बनाए। शिवपुरी शहर के मनियर तालाब में लगभग 80 फीसदी एरिया पर कब्जा ओर खेती की जा रही है, शेष तालाब का पानी जलकुंभी पी रही है।
कार्यपालन यंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग, खण्ड शिवपुरी द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के आधार पर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई स्रोतों से निरंतर जल दोहन के कारण पेयजल स्रोतों के जल स्तर में गिरावट दर्ज की गई है। इसके परिणामस्वरूप नल-जल योजनाओं के स्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जिससे आगामी समय में पेयजल संकट की स्थिति संभावित है।
उक्त परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए कलेक्टर रवीन्द्र कुमार चौधरी ने मप्र पेयजल परिरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 3 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए शिवपुरी जिले के संपूर्ण शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र को आगामी आदेश तक जल अभावग्रस्त (जल अकाल) क्षेत्र घोषित किया है। जिले में निजी नलकूपों के खनन पर आगामी आदेश तक प्रतिबंध लगाया गया है। बिना कलेक्टर अथवा अधिकृत अधिकारी की अनुमति के किसी भी जल स्रोत से घरेलू उपयोग को छोड़कर अन्य प्रयोजनों हेतु जल उपयोग प्रतिबंधित रहेगा।
नियम तोड़ा तो सजा
अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन की स्थिति में प्रथम अपराध पर ₹5000 तक का जुर्माना तथा पुनरावृत्ति पर ₹10,000 तक का जुर्माना अथवा अधिकतम 2 वर्ष का कारावास का प्रावधान किया गया है।






