
आनंदपुर ट्रस्ट की भेंट चढ़े आदित्य..! क्योंकि नामांतरण कोई पेंडिंग नहीं, ट्रस्ट के कब्जों की शिकायतें आ रहीं थीं लगातार
सूत्रों ने बताया: सिंधी समाज के ट्रस्ट में बॉस बन बैठे सुरेंद्र, चल रहे अंदरूनी विवाद, पुराने संत हटाए
शिवपुरी से सैमुअल दास…
अशोकनगर कलेक्टर आदित्य सिंह को हटाए जाने का फरमान बुधवार को एकाएक जारी हो गया। जबकि एसआईआर में सबसे बेहतर काम करने के एवज में उनको प्रदेश में सम्मानित किया जाना था। आदित्य की रवानगी में आनंदपुर ट्रस्ट का हाथ बताया जा रहा है, तथा किसी नामांतरण के एवज में कलेक्टर पर 3 करोड़ मांगे जाने का आरोप लगाया है। सूत्रों का कहना है कि ऐसा कोई नामांतरण आनंदपुर ट्रस्ट का लंबित नहीं है, क्योंकि नए गुरु को पदभार संभाले हुए भी 6 साल से अधिक हो गया। महत्वपूर्ण बात यह है कि पिछले 2- 3 महीने से क्षेत्र के किसानों की जनसुनवाई में यह शिकायतें जरूर आ रहीं थीं कि ट्रस्ट वाले उनकी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं।बताते हैं कि कलेक्टर आदित्य कब्जों को हटवाने के लिए तत्काल जेसीबी भेज देते थे।
अशोकनगर के विश्वस्त सूत्रों के अनुसार आनंदपुर ट्रस्ट में पिछले तीन साल से सुरेन्द्र जाट संत शब्द विवेकानंद बनकर आए हैं, और ट्रस्ट के गुरु के बहुत खास हैं। बताते हैं कि सुरेंद्र संत पहले राम रहीम के साथ रहे थे। आनंदपुर ट्रस्ट में उन्होंने अपने नजदीकियों को बुलाकर महत्वपूर्ण पदों पर विराजमान कर दिया, तथा पुराने संतों के खिलाफ एफआईआर आदि होने के बाद उन्हें हटाया भी जा चुका है, तथा ट्रस्ट में चल रही खींचतान के मामले कई बार बाहर भी आ जाते हैं। ट्रस्ट में अब सिंधी वर्सेस जाट की खींचतान चल रही है। बताते हैं कि पिछले कुछ समय से किसानों की जमीनों पर कब्जों की शिकायतें लगभग हर मंगलवार की जनसुनवाई में आ रहीं थी। जिसके चलते किसी बड़ी कार्रवाई की तैयारी भी थी, लेकिन उससे पहले ही रवानगी दे दी गई।
अनुयायी भी लेते है ऑनलाइन परमीशन
आनंदपुर ट्रस्ट में प्रवेश करना हर किसी के लिए संभव नहीं है। ट्रस्ट के अनुयायी को भी पहले ऑनलाइन परमीशन लेनी पड़ती है, तब उसे अंदर प्रवेश मिलता है। ट्रस्ट के अंदर की हाईटेक व्यवस्थाएं हैं। ट्रस्ट में हरियाणा और दिल्ली के चुनाव में भाजपा को भरपूर सहयोग किया, तथा पार्टी में उच्च स्तर पर पकड़ भी है।
उधर सीएस ने किया सीएम की सोच का खुलासा
दैनिक भास्कर ने आज जो खबर लगाई है, उसमें प्रमुख सचिव (सीएस) ने कलेकतर और एसपी की बैठक में यह खुलासा किया है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री यह कहते हैं कि कोई भी कलेक्टर बिना पैसे लिए काम नहीं कर रहा। अब ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि मुख्यमंत्री का ऐसा कहना प्रदेश की आईएएस लॉबी की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है।







