
केंद्रीय योजना के टॉप रहे रविंद्र, राज्य की योजनाओं में पिछड़े, अर्पित को जिला मिलने पर भी उठ रहे सवाल
सीएम व सीएस ने जो टारगेट तय किए, उसमें श्योपुर से कम शिवपुरी के आंकड़े, प्रशासन व राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा सरगर्म
शिवपुरी से सैमुअल दास::
मध्यप्रदेश में की गई प्रशासनिक सर्जरी से पूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रमुख सचिव ने मिलकर कुछ मापदंड तय किए थे, इस तरह की चर्चा रही। जिसके तहत शासन की विभिन्न योजनाओं के अलावा अन्य कार्यों को इसमें शामिल किया गया। शिवपुरी कलेक्टर रहे रविंद्र चौधरी ने केंद्र सरकार से मिले टारगेट पर फोकस किया, और शिवपुरी को राष्ट्रपति पुरस्कार दिलवाया। इधर प्रदेश सरकार के मुखियाओं ने अपने स्टेट लेवल के आंकड़ों को ट्रांसफर के लिए पैमाना बनाया। जिसमें चौधरी पिछड़ गए, लेकिन श्योपुर में रहते हुए अर्पित वर्मा ने भी परिणाम शत-प्रतिशत नहीं दिया, लेकिन शिवपुरी से बेहतर रहा। चूंकि अर्पित वर्मा सहित ऐसे 6 कलेक्टर हैं, जिन्हें शर्त के अनुसार जिला नहीं मिलना था, इस तरह की एक खबर शुक्रवार को प्रकाशित हुई। तो फिर क्या वर्तमान राजनीति को डिस्टर्ब करने की तैयारी है।
यह तो सर्वविदित है कि शिवपुरी में हुए केंद्रीय मंत्री व क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के होने वाले कार्यक्रमों को भव्यता प्रदान करने में रविंद्र चौधरी ने बहुत मेहनत की, जिसका ताजा उदाहरण शिवपुरी में लगाया गया मेगा हेल्थ कैंप है, जिसमें रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों ने रिकॉर्ड बना दिया। चौधरी, केंद्रीय मंत्री की गुड बुक में थे, तो फिर रिटायरमेंट से एक-दो माह पूर्व तक क्यों नहीं रुके?, सिंधिया एवं भाजपा संगठन + सरकार के बीच निगम और मंडल को लेकर खींचतान के समाचार भी आए दिन आ रहे हैं। क्या जान बूझकर सरकार ने चौधरी को रिटायरमेंट से 7 माह पूर्व हटा दिया, जबकि सुना है कि अर्पित वर्मा की सिंधिया या उनके लोगों से कोई टचिंग नहीं है। अब इसमें बड़ा सवाल यह भी है कि बिना बेस्ट परफॉर्मेंस दिए पुनः कलेक्टर बनने वाले 6 लोगों में अर्पित का नाम है, तो उनका शिवपुरी स्थानांतरण क्यों किया गया?, यह चर्चा न केवल प्रशासनिक गलियारों में, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी सरगर्म है।
राजनीतिक जमीन कारोबारी भी चिंतित
आज के दौर में हर कोई जमीन के कारोबार से जुड़ा हुआ है, जिससे राजनीतिक लोग भी अछूते नहीं हैं। कॉलोनियां काटने से लेकर जमीनों की खरीद फरोख्त में नेताओं की टीम में राजस्व विभाग के पटवारी, रीडर के अलावा नायब तहसीलदार तक शामिल हैं। इसमें कुछ टीआई भी जमीन कारोबारियों के इस गुट में डराने-धमकाने के लिए जुड़े हुए हैं। पिछले दिनों पूर्व कलेक्टर रविंद्र चौधरी ने करेरा में ऐसे ही रैकेट के 7 लोगों पर गैर जमानती धाराओं में एफआईआर करवाई। चूंकि श्योपुर के रास्ते से शिवपुरी आ रहे अर्पित वर्मा की श्योपुर में अवैध कालोनियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की चर्चा है। ऐसे में सिंधियानिष्ठ जमीन कारोबारियों की धड़कनें भी बढ़ी हुई हैं, क्योंकि साहब तो अपने नेता के टच में नहीं हैं..!
परफॉर्मेंस में कौन- कहां
काम/योजना शिवपुरी श्योपुर
राजस्व प्राप्ति 34 %। 71 %
सीमांकन लंबित 119। 25
बंटवारा लंबित 715। 269
नामांतरण लंबित 4254 880
नलजल संचालन 92.09 % 96.06 %
सरसों भावांतर पंजीयन 4808 1870
सरनेम को लेकर भी लग रहे कयास…
आज के दौर में सरनेम पर पूरी तरह से भरोसा नहीं किया जा सकता। इसके उदाहरण राजनीतिज्ञ में बहुत हैं, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, असल में धाकड़ है। नवागत कलेक्टर वर्मा हैं, जिसके चलते कोई धाकड़ मान रहा है, तो कोई लाला। हालांकि अधिकारी को इस जातिगत आंकड़ों से ऊपर उठकर काम करना चाहिए, और शायद करते भी हैं।






