April 9, 2026
पार्षदों को शायद हो, लेकिन जनता को अब भरोसा नहीं रहा नेताओं पर, पहले भी दिखा चुके हैं अपना असली रंग

पार्षदों को शायद हो, लेकिन जनता को अब भरोसा नहीं रहा नेताओं पर, पहले भी दिखा चुके हैं अपना असली रंग
भाजपा की प्रदेश सरकार में नगर निगम और नगरपालिका में भ्रष्टाचार चरम पर, तमाशबीन जनता देख रही शहर की बदहाली

शिवपुरी। नगरपालिका का काम शहर विकास का होता है, लेकिन शिवपुरी में यह स्वायत्ती संस्था लूट खसोट का अड्डा बनाकर रह गई। हालात इतने खराब हैं कि भाजपा के 12 पार्षद, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने जा पहुंचे। इस दौरान विधायक ने भी अपना दर्द बयां किया। अब प्रदेश अध्यक्ष अपनी दी गई टाइम लाइन में कोई एक्शन लेंगे?, इस पर पार्षदों को भले ही भरोसा हो, लेकिन शहर की जनता विश्वास नहीं कर पा रही । क्योंकि इससे पहले वो नेताओं को गिरगिट की तरह रंग बदलते देख चुकी है।
पिछले लगभग 6 माह से चल रहे एपीसोड में करेरा के बगीचा सरकार से लेकर अविश्वास प्रस्ताव का आवेदन दिया गया। जिसे वापस कराने के लिए प्रभारी मंत्री सर्किट हाउस में पार्षदों को समझाने में आधी रात तक जागते रहे। भाजपा जिलाध्यक्ष ने तो कलेक्ट्रेट पर पत्रकारों से कहा था कि पार्षदों ने अंटी बांधकर कसम खाई थी। यानि रूठों को मनाने के लिए आस्था का भी मजाक उड़ा दिया गया। जब पार्षदों ने नेताओं की बात पर भरोसा करके अविश्वास का आवेदन वापस ले लिया। इसके बाद तो प्रभारी मंत्री से लेकर जिलाध्यक्ष ने पार्षदों से मुंह मोड़ लिया। दो माह तक हताश बैठे पार्षदों को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने फिर भरोसा दिलाया है….देखते हैं क्या होता है….!

शहर बदहाल, नपा में चल रही मनमानी

शिवपुरी शहर के मुख्य बाजार की सड़कों से लेकर महल कॉलोनी जैसी धनाढ्यों की कॉलोनी में बदहाल सड़कों पर लोग गिरते-उठते घर पहुंच रहे हैं। सड़कों की दुरुस्ती के लिए नपा में आए 4.50 करोड़ रुपए नपा के जिम्मेदार और ठेकेदार मिलकर निपटा गए, जिसकी फाइल भी नपा से गायब है।
– गांधी पार्क में अवैधानिक रूप से मेला चलवाया जा रहा है, लेकिन ईश्वर उसे बारिश से फैल कर रहा है।
– मेडिकल कॉलेज सहित अन्य स्थानों की पार्किंग के ठेके नपा परिषद ने नहीं किए, लेकिन यहां अवैधानिक रूप से रसीद काटकर वसूली चल रही है।
– शहर में जमीनों के कारोबार में भी अघोषित पार्टनर के रूप में शामिल होकर अतिरिक्त इनकम ऑफ सोर्स बना लिया है।

पार्षदों को शायद हो, लेकिन जनता को अब भरोसा नहीं रहा नेताओं पर, पहले भी दिखा चुके हैं अपना असली रंग

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