
नपाध्यक्ष को हटवाने भोपाल पहुंचे एक दर्जन पार्षद, दूसरे सपोर्टर ने अध्यक्ष को सुरक्षित कर सीएमओ को ठहराया गलत
नपाध्यक्ष व सीएमओ का विवाद पहुंचा राजधानी, सामने आ सकते हैं कोई परिणाम, पिछली कवायद देख जनता निराश
शिवपुरी। नगर की प्रथम नागरिक यानि नपाध्यक्ष को रविवार की रात हुए कार्यक्रम में मंच पर जगह नहीं मिलने की चर्चा अभी थमी भी नहीं थीं, कि एक दर्जन पार्षदों के भोपाल कूच ने फिर से कुर्सी को खतरे में ला दिया। प्रदेश अध्यक्ष ने 10 दिन का समय मांगा है। महत्वपूर्ण बात यह है कि पार्षदों के बाद नपाध्यक्ष के हितैषी नेताजी भी प्रदेश अध्यक्ष के पास पहुंचे। बताते हैं कि उन्होंने सीएमओ का विकेट चटकाने की तैयारी कर ली है। चूंकि पिछले महीनों में शहर की जनता ऐसे एपीसोड देख चुकी है, इसलिए वो अब रिजल्ट का इंतजार कर रही है।
विश्वसनीय सूत्रों की माने तो भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के पास शिवपुरी नगरपालिका के एक दर्जन पार्षद दो शर्त लेकर गए। जिसमें या तो नपाध्यक्ष को हटाया जाए, या फिर हमारी भाजपा से प्राथमिक सदस्यता खत्म कर दी जाए। एक साथ 12 भाजपा पार्षदों का पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा संगठन के लिए एक बड़ा चैलेंज बन जाता। बताते हैं कि प्रदेश अध्यक्ष को पार्षदों ने नगरपालिका में हुए प्रमाणित भ्रष्टाचार बताए, तो उन्होंने न केवल उनकी बात को इत्मीनान से सुना, बल्कि कुछ संबंधित लोगों से भी चर्चा की। जिसके बाद पार्षदों को यह उम्मीद है कि प्रदेश अध्यक्ष 10 दिन में कोई रिजल्ट अवश्य देंगे।
भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि पार्षदों की मुलाकात के बाद भाजपा जिलाध्यक्ष भी प्रदेश अध्यक्ष से मिलने गए। चर्चा है कि उन्होंने अध्यक्ष को पाक साफ बताने एवं सीएमओ का विकेट गिराने की बात पर जोर दिया है। चूंकि एक समय तो अध्यक्ष के साथ सीएमओ की भी अच्छी पटरी बैठ रही थी, क्योंकि हिस्सेदारी बराबर की थी। पिछले दिनों सीएमओ द्वारा बाला- बाला भुगतान किए जाने पर नपाध्यक्ष बिफर गई थीं। हालांकि पार्षदों ने भी सीएमओ की कोई तारीफ नहीं की, जिसके चलते लगता है कि एक-एक करके दोनों विकेट जा सकते हैं। हालांकि SD News इस बात का दावा नहीं कर रहा, लेकिन इस बार तोमर गुट के लोग शामिल न होने से हरी झंडी की उम्मीद है।
पहले युद्ध के योद्धा नहीं आए नजर
नपाध्यक्ष के खिलाफ पार्षदों का यह दूसरा युद्ध है। इससे पहले वाले विरोध प्रदर्शन में सबसे आगे रहने वाले उपाध्यक्ष पति रामजी व्यास नजर नहीं आ रहे। शायद उनका बेटा क्षेत्रीय सांसद की टीम में सक्रिय है, इसलिए पिता ने खुद को पीछे कर लिया है।






