
बैराड़ तहसीलदार ने जांच रिपोर्ट में पटवारी व ऑपरेटर को दोषी माना, कलेक्टर ने मंडी सचिव के खिलाफ भेजा प्रतिवेदन
मामला शिवपुरी वो बैराड़ में भावांतर योजना में घोटाला: जिसकी जमीन नहीं, उसे पटवारी ने जमीन का मालिक बना दिया
शिवपुरी। घोटालों के लिए कुख्यात हो चुके शिवपुरी जिले में दिसंबर 2025 में किसानों के लिए सरकार द्वारा संचालित भावांतर योजना में भी घोटाला हो गया। जिसमें पटवारी ने अन्य व्यक्तियों को कृषि भूमि स्वामी बताकर भावांतर में पंजीयन करा दिया। मामले की जांच में बैराड़ तहसीलदार ने पटवारी एवं ऑपरेटर को दोषी माना, लेकिन राजस्व विभाग के मुखिया यानि कलेक्टर ने अपने अमले को बचाकर मंडी सचिव के खिलाफ प्रतिवेदित एमडी मंडी को भेज दिया। जिसके परिणाम स्वरूप मंडी सचिव रामकुमार शर्मा को दोनों मंडियों से सस्पेंड करके हटा दिया गया।
ऐसे समझें भावांतर घोटाले का मामला:
दिसंबर 2025 में सोयाबीन की फसल का भावांतर योजना के तहत किसानों ने सहकारी संस्थाओं पर पंजीयक कराया। किसानों ने भूमि मालिक होने के जो दस्तावेज पेश किए, उनको संबंधित पटवारी ने प्रमाणित किया। इस पूरे खेल में कुछ ऐसे लोगों का पंजीयन कर दिया गया, जिनके नाम से जमीन थी ही नहीं, लेकिन उन्हें किसान बनाकर भावांतर योजना का लाभ दे दिया गया। जिसमें शिवपुरी में ऐसे 15 और बैराड़ में 13 मामले सामने आए।
भावांतर में घोटाले की जानकारी लगते ही कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी ने जांच के आदेश दिए। बैराड़ तहसीलदार दृगपाल सिंह वेश्य ने 11 दिसंबर 2025 को जांच प्रतिवेदन कलेक्टर को भेजा, जिसमें उन्होंने स्पष्ट उल्लेख किया कि इस घोटाले के आरोपी संबंधित पटवारी एवं पंजीयन करने वाला कंप्यूटर ऑपरेटर है। जिलाधीश ने दोषियों पर कार्यवाही करने की बजाए मंडी सचिव राम कुमार शर्मा के खिलाफ एमडी मंडी को प्रतिवेदन भेज दिया। जिसके परिणामस्वरूप मंडी सचिव को सस्पेंड करके हटा दिया गया।






