
मूर्तियों में चोरी करने वालों, क्या ईश्वर से भी नहीं डरते?, जो एक हवा के झोंके में आपकी असलियत बता देता है
महाकाल में भी मूर्तियों ने पलट कर बताया था कि हमारे नाम पर भी हुआ है भ्रष्टाचार, हद है प्रदेश की नगरपालिकाओं में
शिवपुरी से सैमुअल दास…
मध्यप्रदेश की नगरपालिकाओं में भ्रष्टाचार किस चरम पर है, इसका उदाहरण अभी हाल ही में खरगोन में सामने आया, जब 10 लाख रुपए का भुगतान करके 1 लाख रुपए कीमत की टांटया की प्रतिमा लगा दी। हवा के तेज झोंके में जब प्रतिमा गिरी, तब पता चला कि स्टील की जगह फाइबर की लगा दी।
ज्ञात रहे कि बीते वर्ष महाकाल में भी हवा का ऐसा ही एक झोंका आया था, जिसमें वहां लगाई गई खोखली मूर्तियां स्वत ही पलट गई थीं। उस दौरान इस मुद्दे पर कई लोगों ने प्रतिक्रिया दी थी कि मूर्तियां खोखली नहीं बनाई जाती, लेकिन भ्रष्टाचार करने वालों ने ईश्वर की मूर्ति में भी जेब भरने का रास्ता ढूंढ लिया।
कहते हैं कि इंसान को ईश्वर ने मिट्टी से पुतले के रूप में बनाया, और उसमें जीवन का श्वांस फूंका। इंसान अब इतना लालची हो गया कि भगवान से भी नहीं डरता। जबकि वापसी के दौरान 5 का सिक्का भी नहीं ले जाएगा, लेकिन अवैध कमाई करने का वो कोई भी मौका नहीं छोड़ रहा।
हवा का झोंका ही काफी है बेनकाब करने को
लोग भ्रष्टाचार करके खुद को पैसे वाला बनाने की कोशिश करते हैं, लेकिन जब ईश्वर को उसे बेनकाब करना होता है, तो वो हवा के एक झोंके में ही सच्चाई से पर्दा हटा देता है। जैसा कि टंट्या प्रतिमा व महाकाल की मूर्तियों के पलटने से हुआ।
सिकंदर के भी हाथ बाहर थे कफन से
सब कुछ जीतने वाले सिकंदर ने भी मौत से पहले अपने नजदीकियों से कहा था कि जब ले जाओ तो मेरे दोनों हाथ कफन से बाहर कर देना, ताकि यह दुनिया देख सके कि इसके भी हाथ खाली थे। फिर भी इस अंधी दौड़ में हर कोई दौड़ रहा है। कोरोना महामारी में लोगों को कुछ समझ आया था, लेकिन अब दुनिया फिर उसी ढर्रे पर चलने लगी…!







