50 हजार के इनामी रामवीर दाऊ (पूर्व टीआई) को हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत सुप्रीम कोर्ट ने की निरस्त
खुद ही अपराधियों का रैकेट चलाकर सिपाही से बना था थानेदार, दोहरे हत्याकांड में तीन साल तक रहा फरार, फिर गया जेल
शिवपुरी। 50 हजार रुपए के इनामी व तीन साल तक फरार रहे रामवीर सिंह कुशवाह दाऊ (पूर्व टीआई) को आत्माराम पारदी की हत्या के मामले में हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत को सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते ख़ारिज कर दिया।
शिवपुरी के रन्नौद का दाऊ, बना वर्दी वाला अपराधी
रामवीर सिंह कुशवाह जिसको दाऊ के नाम से जाना जाता है, रंनोद शिवपुरी का रहने वाला है मध्य प्रदेश पुलिस में आरक्षक के पद पर भर्ती हुए दाऊ की कर्मभूमि गुना रही है, जहाँ पर उसने एक नेटवर्क बना रखा था, जिसके चलते उसने कई एनकाउंटर किए तथा आउट ऑफ़ टर्न प्रमोशन लेते हुए बाद में वो टीआई धरनावदा बन गया।
हत्या का दर्ज हुआ मामला
धरनावदा में टीआई रहते हुए रामवीर दाऊ दो लोगों आत्माराम पारदी और माखन कुशवाह की हत्या का मामला दर्ज हुआ। विश्वस्त सूत्रों की माने तो रामवीर दाऊ एक नेटवर्क चलाता था, तथा वर्दी की आड़ में वो पारदी गिरोह से देश के अलग अलग हिस्सों में बड़ी लूट और डकैती करवाता था। पूरी वारदात को वो मैनेज करता थाI इसमें उसने कई एनकाउंटर भी किए और गुना में ऐसे कई कारनामों के लिए जाना जाता रहा है।
मृतक के परिवार ने 10 साल लड़ी लड़ाई
वर्ष 2015 में आत्माराम पारदी की हत्या के मामले में रामवीर दाऊ टीआई धरनावद आरोपी था। मृतक के परिवार द्वारा कई सालों तक कानूनी लड़ाई के बाद रामवीर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाया। उसके बाद अपराधों की गुत्थी खुलती चली गईI जिसमें रामवीर के साथ में उसके सहियोगी रघुराज गुर्जर, योगेन्द्र सिंह, और दिनेश के ऊपर भी कायमी की गईI
मामला दर्ज होते ही दाऊ फरार
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद से रामवीर फरार हो गया और तीन साल तक फरार रहाI इस बीच उस पर मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा 50000/- का इनाम घोषित हुआ, उसको निलंबित करके उसकी सेवा समाप्त की गई। पुलिस उसको पकड़ नही पाई।
2025 में जिला न्यायालय से अग्रिम जमानत ख़ारिज होने के बाद उसने उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए याचिका लगाईI
हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत
हाईकोर्ट न्यायमूर्ति अनिल वर्मा द्वारा रामवीर को अग्रिम जमानत दे दी गई जबकि ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत नही दी जा सकती। जहाँ आरोपी तीन साल से फरार हो, तथा जब उसके ऊपर 6 रिपोर्ट दर्ज हैं, तथा उन अपराधों में संलिप्तता के पर्याप्त साक्ष्य हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज
इस मामले में सुलोचना पारदी द्वारा याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई थी। जहाँ उसने रामवीर को दी गई अग्रिम जमानत को ख़ारिज करने की मांग कीI राज्य सरकार में भी रामवीर की जमानत ख़ारिज करनी पर सहमति और सपोर्ट दिखायाI बीते 6 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रामवीर की जमानत ख़ारिज कर दी गईI
रामवीर अक्टूबर 2025 से जेल में है, माखन कुशवाह की हत्या सम्बंधित मामले में और उसमे भी उसकी दूसरी जमानत याचिका उच्च न्यायालय द्वारा ख़ारिज कर दी गई है जनवरी 2026 में I
शिवपुरी एडवोकेट अभय की रही अहम भूमिका
पूरे मामले में गुना, ग्वालियर, दिल्ली के वकीलों की टीम ने काम किया। जिसमे एक आहम भूमिका युवा अधिवक्ता अभय जैन की रही। वो अपनी टीम के साथ प्रयासरत हैं कि इस मामले में आरोपियों को सजा करवाई जाए।







