February 4, 2026
पूर्व कांग्रेसियों की भाजपा जिला कार्यकारिणी घोषित, तोमर गुट साफ, कठिन चुनौती के बीच हेमंत ने बनाई जगह

पूर्व कांग्रेसियों की भाजपा जिला कार्यकारिणी घोषित, तोमर गुट साफ, कठिन चुनौती के बीच हेमंत ने बनाई जगह
51 फीसदी से अधिक आयातित, 20 परसेंट परिवार के साथ, 28 प्रतिशत भाजपा के, लवलेश व बिजली ठेकेदार बने महामंत्री

शिवपुरी। भारतीय जनता पार्टी की बहुप्रतीक्षित जिला कार्यकारिणी सोमवार को घोषित हो गई। जिसमें 51 फीसदी से अधिक आयातित कांग्रेसी हैं, जबकि 28 प्रतिशत भाजपा के तथा 20 परसेंट ऐसे नाम हैं, जो सिंधिया परिवार के साथ जुड़े हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस सूची में तोमर गुट साफ हो गया, तथा इतने कठिन संघर्ष में हेमंत ने अपनी जगह बचाए रखी।
गौरतलब है कि पिछले दिनों गुटबाजी पर चल रही डिबेट में कांग्रेस प्रवक्ता अजीत भदौरिया ने कहा था कि भाजपा में गुटबाजी इस कदर हावी है कि अभी तक कई जिलों की कार्यकारिणी घोषित नहीं हुई। कांग्रेस के आरोपों के बीच आज जब 30 नामों से सुसज्जित भाजपा जिला कार्यकारिणी घोषित हुई, तो उसमें 8 मूल भाजपाई हैं, जबकि 5 पदाधिकारी सिंधिया परिवार के सदस्यों से जुड़े हैं, शेष बचे 17 पदाधिकारी उन्हें बनाया गया है, जिन्होंने सिंधिया के साथ कांग्रेस का पट्टा उतारकर भाजपा का दामन थामा था। ऐसे लोगों को केंद्रीय मंत्री बहुत पसंद करते हैं, और पिछले दिनों दौरे के दौरान जसमंत जाटव की मंच से तारीफ की थी। नक्षत्र के लवलेश जैन चीनू और करेरा के बिजली ठेकेदार गोपाल पाल के नाम SD News ने पहले ही घोषित कर दिए थे।

वो मूल भाजपाई, जिनको थी कठिन चुनौती

जिला कार्यकरिणी में 8 मूल भाजपाई हैं, जिन्हें भीड़ अधिक होने की वजह से कठिन चुनौती का सामना करना पड़ा। इनमें पवन लोधी, विक्की मंगल, हरिशंकर दुबे, कृष्णबिहारी गुप्ता, सुनील भार्गव, वेदांत सविता, हेमंत ओझा और जंडेल सिंह शामिल हैं। इन 8 पदाधिकारियों को कार्यकारिणी में जगह बनाना बहुत कठिन चुनौती रही, क्योंकि भीड़ अधिक थी।

यह हैं आयातित कांग्रेसी, जिन्हें मिली जगह

योगेंद्र रघुवंशी बंटी (खरेह), लवलेश जैन, अवतार सिंह गुर्जर,, प्रद्युम्न वर्मा, धर्मेंद्र रावत, इंजी. गोपाल पाल, भूपेंद्र यादव, सालिगराम, डॉ. रश्मि गुप्ता, हेमलता रघुवीर रावत, नीरज तोमर, कपिल तिवारी, सोनू कुशवाह, मुकेश जैन, रागिनी सोनी व सोनू राजावत शामिल हैं।

इनके लिए कठिन था संघर्ष

उपाध्यक्ष बने हेमंत ओझा के साथ पूर्व सांसद का डॉ. केपी यादव का नाम जुदा था, जबकि हेमंत ने पूर्व सांसद से लेकर जिलाध्यक्षों के साथ सहयोगात्मक रवैया रहा था। हेमंत ने अपने काम पर जगह बनाई। उधर लवलेश की ड्राइविंग में महान आर्यमन को चोट लग गई थी, लेकिन सूची में बनाए गए 3 महामंत्री में लवलेश का नाम शामिल रहा।

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