
बेरोजगारी का झटका: आरक्षक का फिजिकल पास कर, लिखित परीक्षा में हुआ फेल, तो खोया मानसिक संतुलन
एटा उप्र से 9 माह पूर्व गायब युवक को वन देवी मंदिर पर मिला आश्रय, याद आया परिजनों का मोबाइल नंबर, चौकी प्रभारी व बाबा ने सौंपा
शिवपुरी। जिले के कोटा-झांसी फोरलेन पर अमोला पुल के पास स्थित वन देवी मंदिर (बंसी वाले) पर दो माह से रुके एक मानसिक रूप से कमजोर युवक को एकाएक परिजनों का मोबाइल नंबर याद आ गया। मंदिर के बाबा हरिओम दास ने अमोलपठा चौकी प्रभारी सतीश जयंत को जानकारी दी। अगले ही दिन परिजन चारपहिया वाहन से आए, और युवक को ले गए। यह युवक एटा उत्तरप्रदेश का रहने वाला है, जो 9 माह पूर्व गायब हो गया था। महत्वपूर्ण बात यह है कि पुलिस में नौकरी का शौक रखने वाले युवक ने पुलिस आरक्षक का फिजिकल तो पास कर।लिया था, लेकिन लिखित परीक्षा पास न कर पाने की वजह से वो मानसिक संतुलन खो बैठा।
एटा उप्र के रहने वाले 75 वर्षीय चंद्रपाल सिंह के तीन बेटों और दो बेटियों में सबसे छोटे बेटे जितेंद्र सिंह की शुरू से इच्छा थी कि वो पुलिस में नौकरी करे। इसके लिए उसने फिजिकल की प्रैक्टिस की और उसने वर्ष 2010 में फिजिकल अच्छे नंबरों से पास किया। इसके बाद जब लिखित परीक्षा हुई, तो उसमें जितेंद्र को सफलता नहीं मिल पाई। बस उसके बाद से उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया। बीते 9 माह पूर्व वो घर से भाग आया और पिछले दो माह से वो शिवपुरी के अमोला पुल के पास स्थित वन देवी मंदिर पर आकर रुक गया।
मंदिर के पुजारी हरिओम दास ने बताया कि वो यूं ही मंदिर के बाहर बैठा मिला, तो हमने उसे प्रसाद वा खाना आदि खिलाया, तो फिर वो यहीं रुक गया। वो गुमसुम बैठा रहता था, किसी से कोई बात नहीं करता और परिजनों का नंबर भी याद नहीं था। बीते 8 जनवरी की सुबह एकाएक जितेंद्र ने बाबा से कहा कि मैं एक नंबर बता रहा हूं, इस पर फोन लगाओ। बाबा को तब आश्चर्य हुआ, जब जितेंद्र ने मोबाइल नंबर इंग्लिश में बताए। वो नम्बर जितेंद्र के एडवोकेट चाचा का था। उन्होंने कहा कि हमारे परिजन उसे लेने आ रहे हैं। बाबा ने चौकी प्रभारी सतीश जयंत से संपर्क करके परिजनों की बात कराई, तथा उन्हें पूरा किस्सा बताया। बीते 9 जनवरी को चारपहिया वाहन से जितेंद्र के पिता और भाई हाइवे स्थित अमोलपठा चौकी आए, और उसे खुशी खुशी अपने साथ ले गए। चौकी प्रभारी ने बताया कि लड़के के पिता बड़े कृषक हैं, तथा आर्थिक रूप से सक्षम परिवार है।
इसी बीच आ गई थी बाघिन
बाबा हरिओम दास ने बताया कि बीते 8 जनवरी को ही माधव टाइगर रिजर्व की बाघिन मंदिर परिसर में आ गई थी। उस दौरान जितेंद्र सहित गांव के लगभग 20 लोगों को बाबा ने मंदिर के अंदर सुरक्षित रखा था, क्योंकि फॉरेस्ट वालों ने उन्हें सचेत कर दिया था।
(SD न्यूज के अमोला रिपोर्टर सोनू सेन का साभार)








1 thought on “बेरोजगारी का झटका: आरक्षक का फिजिकल पास कर, लिखित परीक्षा में हुआ फेल, तो खोया मानसिक संतुलन”