
सरदारपुरा से मोहम्मदपुर गांव के खेतों में पहुंची बाघिन, दहशत में ग्रामीणजन, नहीं जा पा रहे खेतों में
मवेशियों ने भी डाला घरों पर डेरा, नहीं जा रहे जंगल में चरने, मोहम्मदपुर में ही बाघिन ने किया गाय का शिकार
बोले ग्रामीणजन: अब तो गांव में रहना हो रहा मुश्किल, शाम होते ही घरों में दुबकने को मजबूर
शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व में आई बाघिन की दहशत अब झांसी रोड किनारे स्थित बसे गांव में देखी जा रही है। सुरवाया के सरदारपुरा गांव से निकलकर यह बाघिन अब मोहम्मदपुर गांव के।खेतों में चहलकदमी कर रही है। जिसके चलते ग्रामीण जहां अपने खेतों पर नहीं जा पा रहे, तो वहीं मवेशी भी जंगल में जाने से डर रहे हैं, क्योंकि बाघिन ने एक गाय को भी अपना निशाना बनाया है।
इस बाघिन से पहले नर टाइगर तांडव आया था, लेकिन वो इतना अधिक रिहायशी इलाकों में नहीं गया, जितना यह बाघिन जा रही है। पहले वो चाड गांव में पहुंची, जहां से होकर वो ग्वालियर रोड पर स्थित सतनबाड़ा के ग्राम डोंगर में पहुंची और एक ग्रामीण पर उस समय हमला कर दिया, जब वो घने कोहरे के बीच खेत पर शौच के लिए जा रहा था। इस घटना के बाद से ग्रामीणजन और भी दहशतज़दा हो गए।
इस बाघिन के गले।में लगा जीपीएस सिस्टम अभी काम कर रहा है, इसलिए साथ में एंटीना लेकर चले रही टीम भी उसके आसपास ही घूम रही है। बाघिन ने अपना रूट एकाएक बदल के झांसी रोड की दिशा पकड़ ली। अब यह सुरवाया के सरदारपुरा गांव के बाद मोहम्मदपुर गांव में जा पहुंचे। इस मादा टाइगर को अभी नर नहीं मिला है, इसलिए यह लगातार अपना मूवमेंट जंगल की जगह रिहायशी इलाकों में बनाए हुए है।
ग्राम मोहम्मदपुर के पूर्व सरपंच हरिसिंह जाटव ने बताया कि जबसे बाघिन ने खेतों मे डेरा डाला है, तबसे हम लोगों ने खेतों पर जाना बंद कर दिया। हमारे घरों की बागड़ भी टूटी हुई है, जिस वजह से रात भर डर की वजह से सो भी नहीं पा रहे हैं। गांव की एक महिला ने बताया कि हमारे मवेशी भी जंगल।में नहीं जा रहे हैं, और गाय आदि घर के सामने ही बैठे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि 2 महीने पहले भी नाहर आया था, जिसे फॉरेस्ट वाले जंगल।में ले गए थे, लेकिन इस बाघिन को वो साथ नहीं ले जा रहे, बल्कि उसके संग आसपास घूम रहे हैं।
पर्यटन बढ़ेगा या ग्रामीण जीवन बिगड़ेगा..?
शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व में टाइगर आने के बाद पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है। साथ ही झांसी रोड के गांव में बनाए हुए होम स्टे और फॉर्म स्टे में भी सैलानी बड़ी संख्या में रुकने आ रहे हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि फार्म या होम स्टे में रुके सैलानियों को अक्सर तेंदुए सहित अन्य वन्यजीव यूं ही दिख जाया करते थे, और अब तो टाइगर भी नजर आ सकता है, क्योंकि वो भी गांव के आसपास ही घूम रहा है। टाइगरों की आमद से एक तरफ पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, तो वहीं दूसरी ओर नेशनल पार्क के आसपास बसे गांव में रहने वाले लोगों के जीवन पर खतरा मंडराने लगा है।








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