
गायत्री ने गजब की किस्मत पाई, इतनी आंधियों में भी उनकी कुर्सी नहीं डगमगाई
डेढ़ दर्जन पार्षदों ने दो महीने मेहनत की, रेप पीड़िता ने जान देने का प्रयास किया, फिर भी अदृश्य बीटों रोके हुए
शिवपुरी। नगर की प्रथम नागरिक गायत्री शर्मा की किस्मत को मानना पड़ेगा, इतनी आंधियां आईं, लेकिन वो अपनी कुर्सी पर मजबूती के साथ टिकी हुई हैं। डेढ़ दर्जन पार्षदों ने बगीचा सरकार की कसम खाने के बाद दो महीने जमकर मेहनत की, प्रशासनिक जांच में नपा का भ्रष्टाचार प्रमाणित हुआ, लेकिन नपाध्यक्ष टस से मस नहीं हुईं। नपाध्यक्ष के बेटे पर दुष्कर्म का मामला दर्ज कराने वाली युवती ने नपाध्यक्ष, उनके पति व बेटे के नाम वाला सुसाइड नोट लिखकर अपनी जान देने का प्रयास किया। जिसकी खबर शनिवार को अखबार की सुर्खियां बनी, लेकिन मजाल है कि नपाध्यक्ष के खिलाफ कोई एक्शन हुआ हो। इसे नपाध्यक्ष की किस्मत कहें या फिर उनके पीछे लगा राजनीतिक बीटों है, जो उन्हें हर मुश्किल से बचाए हुए है।
शिवपुरी नपाध्यक्ष की कुर्सी के लिए जब करोड़ों की राशि लेकर बैठे नेताओं में विवाद चल रहा था, उस दौरान गायत्री शर्मा की किस्मत ने जोर मारा, और वो नगर की प्रथम नागरिक बन गईं। बिना मेहनत के फ्री फंड में मिली कुर्सी पर विराजमान होते ही नगरपालिका में विरोध के स्वर बुलंद होने लगे, और मामला पार्षदों के अपहरण तक पहुंच गया। अविश्वास प्रस्ताव का आवेदन नेताओं ने झूठे आश्वासन देकर पॉवर पॉलिटिक्स से वापस करवा दिया, और उसके बाद नेताओं ने पार्षदों की तरफ से मुंह मोड़ लिया।
उधर नपाध्यक्ष के बेटे पर दुष्कर्म का मामला दर्ज कराने वाली युवती ने बताया कि नपाध्यक्ष व उनके परिवार ने उसे इस हद तक मानसिक प्रताड़ित किया कि वो अपनी जान देने पर मजबूर हो गई। वो तो समय पर उपचार मिल गया, जिससे उसकी जान बच गई। इतना सब होने के बाद भी मजाल है कि नपाध्यक्ष की कुर्सी को हल्का सा झटका भी लगा हो। इसकी मुख्य वजह यह है कि भाजपा के कुछ नेता कुर्सी को पकड़े हुए हैं, जिसके चलते गायत्री शर्मा अभी भी नगर की प्रथम नागरिक बनी हुई हैं।
नेताओं की गुटबाजी से मिला अभयदान
जब नपाध्यक्ष का विरोध शुरू हुआ, तो जिन चेहरों ने विरोध दर्ज कराया उन पर नरेंद्र सिंह तोमर के गुट का ठप्पा लगा हुआ था। फिर चाहे पार्षद ओमी जैन हों या फिर नपा उपाध्यक्ष पति रामजी व्यास का नाम भी तोमर गुट में गिना जाता है। हद तो तब हो गई, जब भाजपा विधायक देवेंद्र जैन भी नगर पालिका को नरक पालिका संबोधित कर चुके हैं। लेकिन विधायक पर भी नरेंद्र सिंह तोमर की सील लगी है, इसलिए सिंधिया गुट कभी नहीं चाहता कि नपाध्यक्ष को हटाकर तोमर गुट को जिताया जाए।
एसपी ऑफिस से आंसू पोंछते निकलीं नपाध्यक्ष
शुक्रवार की दोपहर नपाध्यक्ष गायत्री शर्मा पुलिस अधीक्षक से मिलने गईं। संभवतः वो अपने परिवार की बेगुनाही बताने के लिए गईं थीं, क्योंकि रेप पीड़िता ने उनके परिवार पर आरोप लगाते हुए जान देने का प्रयास किया है। एसपी ऑफिस से निकलते समय नपाध्यक्ष अपने आंसू पोंछती हुईं अपनी गाड़ी में सवार हुईं।







