
व्यवसायी दोस्त के लिए देश की जनता का दम घोंटने की तैयारी, पहले से प्रदूषित दिल्ली में जीवन हो जाएगा कठिनअदाणी ग्रुप सिंगरोली के बाद अब अरावली में जंगल काटने को तैयार, पूरे देश का पर्यावरण होगा प्रभावित, बढ़ेगी प्राकृतिक आपदाएं
सिंगरोली से लौटकर सैमुअल दास::
अपने दोस्त को लाभ देने के लिए देश के सरकारी विभागों का निजीकरण करवाने के बाद अब देश की जनता का दम घोंटने की तैयारी कर ली। अदाणी ने पहले सिंगरोली में सैकड़ों हेक्टेयर जंगल कटवाकर कोयले का उत्खनन शुरू करवाया, और देश के पर्यावरण को नियंत्रित करने वाली अरावली की पहाड़ी का जंगल देने की तैयारी कर ली गई। यदि अरावली का जंगल कट गया तो उसका विपरीत प्रभाव पूरे देश के पर्यावरण पर पड़ेगा, जिसमें दिल्ली, हरियाणा व राजस्थान सबसे अधिक प्रभावित होंगे।
क्या है अरावली:
यह एक पर्वतमाला है, जो पालनपुर गुजरात से शुरू होकर 692 किमी लंबाई में रायसीना पहाड़ी दिल्ली तक है। इसकी औसत ऊंचाई 930 मीटर है, तथा सिरोही पर्वतमाला में माउंट आबू का गुरु शिखर है, जिसकी ऊंचाई 1722 मीटर है। यह राजस्थान के 19 जिलों को टच करती है। इसके दक्षिण में घना जंगल है।
ऐसे कंट्रोल करता है पर्यावरण:
692 किमी लंबाई और 930 मीटर ऊंचाई तक पर्वत श्रृंखला में घना जंगल होने से सर्दी, गर्मी और बरसात का कंट्रोल अरावली पर्वतमाला से होता है। चलने वाले रेतीले तूफान से यह पहाड़ी दिल्ली और हरियाणा सहित राजस्थान की जनता को सुरक्षित करती है।
यह होंगे गंभीर परिणाम
दुनिया पहले से ही जलवायु परिवर्तन की मार झेल रही है, ऐसे में यदि अरावली का जंगल काटकर अदाणी ने खनन शुरू करवाया तो पूरे देश का पर्यावरण संतुलन बिगड़ जाएगा। रेतीला तूफान राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा की जनता के लिए आफत बनेगा। वहीं बारिश कम होने के साथ गर्मी अधिक बढ़ जाएगी। दिल्ली का वातावरण पहले ही प्रदूषित है, और यदि अरावली का जंगल कटा तो दिल्ली में जीवन कठिन हो जाएगा।
दोस्त के लिए देश को खतरे में डाल रहे:
यह सर्वविदित है कि अदाणी की मित्रता देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से है। जब में सिंगरोली में था, तब सैकड़ों हेक्टेयर जंगल और उसमें बसे गांव की जमीन कोयला उत्खनन के लिए अदाणी को दी गई। वहां पुलिस ने रात के अंधेरे में गांव वालों पर लठिया बरसाकर खदेड़ा। गरीबों की सुनने वाला कोई नहीं था, क्योंकि पूरे देश का तंत्र अदाणी के लिए काम कर रहा है। अब अरावली की पहाड़ी भी अदाणी को देने की तैयारी कर ली ताकि उसमें भी अदाणी ग्रुप खनन करेगा। सिंगरोली में हजारों पेड़ काटे गए, तथा अरावली में लाखों पेड़ काटने की तैयारी है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ याचिका दायर
अरावली की पहाड़ी का केस सुप्रीम कोर्ट में चल रहा था, जिसमें 20 नवंबर 2025 को निर्णय दिया गया कि 100 मीटर से ऊंची पहाड़ी के जंगल को ही अरावली माना जाकर संरक्षित रखा जाएगा। इस आदेश से लगभग 80 फीसदी अरावली का जंगल नष्ट हो जाएगा। हालांकि इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।
एक पेड़ मां के नाम का ढकोसला क्यों?
देश के प्रधानमंत्री ने एक योजना चलाई है कि लोग एक पेड़ अपनी मां के नाम से लगाएं। इस योजना को चलाकर उन्होंने खुद को प्रकृति प्रेमी बताने का प्रयास किया, जबकि दूसरी तरफ उनके ही दोस्त हजारों-लाखों पेड़ काट रहे हैं।







