
शिवपुरी नगरपालिका में पानी के नाम पर हुआ करोड़ों का भ्रष्टाचार, ईओडब्ल्यू ने लिया संज्ञान में
एक साल के लिए दिया था 99 लाख का ठेका, फर्म को टर्मिनेट करके 3 माह में निकाला 3 करोड़ का भुगतान
शिवपुरी। भ्रष्टाचार के लिए कुख्यात हो चुकी नगरपालिका शिवपुरी ने पानी में भी घोटाला करने से परहेज नहीं किया। वर्ष 2023 में नपा ने एक साल तक नपा के ट्यूबेलों के संधारण का ठेका 99 लाख में दिया, लेकिन जब ठेकेदार ने ट्यूबलों का भौतिक सत्यापन करवाने की मांग की, तो पानी के नाम पर घोटाला करने वाला गिरोह चिंतित हो गया, तथा शिकायतें करके फार्म को टर्मिनेट करवा दिया। इसके बाद इस गिरोह ने 10 हजार की एफडी पर बाजार में काम करवाने के एवज में महज 3 महीने में 3 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया। इस आर्थिक अनियमितता की शिकायत ईओडब्ल्यू में होने के बाद उसे संज्ञान में लिया गया है।
शिवपुरी शहर में नपा के 458 ट्यूबबेल हैं, जिनके संधारण का ठेका दिया जाता था। समाधियां फर्म को जब ठेका मिला, तो ठेकेदार ने नपा के जिम्मेदारों सहित प्रशासन से ट्यूबेलों का भौतिक सत्यापन कराने की मांग रखी। क्योंकि जितने पाइप और जिस कंपनी की मोटर उसमें बताई जा रही है, वो मटेरियल उसमें था ही नहीं। भौतिक सत्यापन की मांग करते ही पानी के नाम पर चोरी करने वाले गिरोह की चिंता बढ़ गई। सत्यापन तो कराया नहीं, लेकिन ठेकेदार को हटाने के लिए षड्यंत्र करके उसे टर्मिनेट कर दिया, जिसके चलते उसकी 32 लाख की एफडीआर सहित उस पर 14 लाख का जुर्माना भी लगा दिया। जब तक ठेकेदार ने काम किया, तब तक सिंध की सप्लाई भी पाइप बदलने के फेर में रोकी गई थी, जिसके चलते पूरा लोड ट्यूबेलों पर ही था।
ठेकेदार को ज्ञान के बाद इस गिरोह ने महज 10 हजार की एफडी पर ठेकेदारों से मात्र तीन महीने में 3 करोड़ का काम बताकर उसका भुगतान भी कर लिया। चूंकि गिरोह में अध्यक्ष, सीएमओ सहित कुछ पार्षद भी शामिल हैं, इसलिए भुगतान के भी कोई रुकावट नहीं आई। ठेकेदार ने यह मामला हाईकोर्ट में लगा दिया है, जहां से नोटिस जारी हुए है। जबकि ईओडब्ल्यू में की गई शिकायत एवं संयुक्त संचालक की जांच में भी भ्रष्टाचार प्रमाणित हो गया है। इसलिए ईओडब्ल्यू ने मामले को संज्ञान में लेकर फरियादी के कथन भी दर्ज कर लिए हैं। ठेकेदार के लीगल एडवाइजर का कहना है कि यदि ट्यूबेंलो का भौतिक सत्यापन किया जाए तो यह घोटाला लगभग 100 करोड़ रुपए का निकलेगा। क्योंकि नपा ने सिर्फ सामग्री के भुगतान के नाम पर केवल बंदरबांट किया है।








