
करोड़ों की लागत से बना स्टेडियम, फिर भी फुटबॉल खिलाड़ियों के लिए नहीं मिल रही जगह
कैसे निखरेंगी खेल प्रतिभाएं?, बड़े दावों के बीच कड़वी सच्चाई, 5 बार जनसुनवाई में दिया आवेदन
शिवपुरी शहर में करोड़ों रुपए की लागत से बनाए गए स्टेडियम में शिवपुरी के खिलाड़ियों को खेल मैदान नहीं दिया जा रहा। पुलिस लाइन में रहने वाले युवा फुटबॉलर वर्तमान में पुलिस पेट्रोल पंप के पीछे ऊबड़- खाबड़ मैदान में रिस्क लेकर खेलने को मजबूर हैं।
फुटबॉल खिलाड़ी मोहित व अन्य ने बताया कि स्टेडियम में फुटबॉल का अच्छा खेल मैदान है। उसने हमें खेलने नहीं दिया जाता। जब हमने जिला खेल अधिकारी केके खरे से बात की तो पहले तो टालते रहे। इसके बाद युवाओं ने पांच बार जनसुनवाई में कलेक्टर से शिकायत की। जिसका परिणाम यह हुआ कि खेल अधिकारी ने उन्हें स्टेडियम में खेलने के लिए परमीशन तो दी, लेकिन समय सुबह 8 से 9 बजे के बीच खेल सकते हो। जबकि यह बात खुद खेल अधिकारी भी जानते हैं कि जो समय वो दे रहे हैं, उस दौरान बच्चे स्कूल और कॉलेज में पढ़ने जाते हैं।
युवाओं का कहना है कि स्कूल-कॉलेज का समय दोपहर तक रहता है, ऐसे में यदि दोपहर 2 से शाम 5 बजे के बीच कोई भी समय दे दिया जाए, ताकि वो भी स्टेडियम में अपनी प्रतिभा को निखार सकें।
खेल मैदान अच्छा होना जरूरी
मप्र शासन की पूर्वा खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने शिवपुरी में करोड़ों की राशि खर्च करके सभी खेलों के लिए अंतरराष्ट्रीय खेल मैदानों की तर्ज पर ग्राउंड बनवाए। जिसमें खेलने का पहला हक तो इस शहर के युवा खिलाड़ियों का है, क्योंकि शहर में भी खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। खेल मैदान अच्छा हो तो खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। शिवपुरी के ही युवाओं को स्टेडियम में जगह न मिलना, इसे युवाओं। की प्रतिभाओं। पर कुठाराघात है।

फुटबॉल खिलाड़ी, जिन्हें नहीं मिल एही स्टेडियम में जगह






