
एक ही पार्टी में अलग गुटों के नेता होने से शिवपुरी शहर हो रहा बदहाल, जनता की सुनने वाला कोई नहीं
केंद्रीय मंत्री कर रहे शिवपुरी को आधुनिक पर्यटन नगरी बनाने का दावा, नपाध्यक्ष की अलग कहानी, विधायक का झूठा निकला शपथ पत्र
शिवपुरी। यूं तो शिवपुरी में नपाध्यक्ष, विधायक, सांसद, सभी भारतीय जनता पार्टी के हैं, लेकिन नेताओं पर लगा गुटों का ठप्पा, शहर विकास में बाधक बना हुआ है। एक तरफ केंद्रीय मंत्री व सांसद इस शहर को आधुनिक पर्यटन नगरी बनाने का दावा कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर नपाध्यक्ष अपने गठबंधन के साथ मिलकर शहर विकास के लिए आने वाले बजट को ठिकाने लगा रही हैं। विधायक का शपथ पत्र भी झूठा साबित हुआ, जो उन्होंने विधानसभा चुनाव में अपने नोटरों को दिया था। शहर की बदहाली इसलिए हो रही है क्योंकि एक ही दल के लोग अलग-अलग गुटों से पहचाने जाते हैं। ऐसे में शहर की जनता मूकदर्शक बनाकर नेताओं का बहरूपियापन देख रही है।
नपाध्यक्ष: गायत्री शर्मा, पार्टी: भाजपा
हालात: बिना कुछ खर्च किए पूर्व केबिनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के आशीर्वाद से नगर की प्रथम नागरिक बन गईं। रहमोकरम से मिली कुर्सी पर बैठते ही गायत्री ने ऐसा रूप बदला कि परिषद में शामिल पार्षद उन्हें कुर्सी से हटाने की शपथ करेरा के बगीचा सरकार में खा आए। पार्षदों ने पूरा जोर लगाया, प्रशासन की जांच में नपाध्यक्ष घोटालों में दोषी पाई गईं, न्यायालय ने भ्रष्टाचार के दर्ज मामले में नपाध्यक्ष व सीएमओ की संलिप्तता मानी, लेकिन केंद्रीय मंत्री का बीटों लगा होने से वो अभी भी कुर्सी पर विराजमान हैं।
विधायक: देवेंद्र जैन, पार्टी: भाजपा
हालात: विधानसभा चुनाव के दौरान माधवचौक सहित शहर में अन्य जगह पोस्टर लगवाए थे, जिसमें लिखा था कि क्या आप शिवपुरी शहर में आतंक और गुंडागर्दी चाहते हो। इस बात से डरकर शहर के व्यापारी ने इस कदर देवेंद्र जैन को वोट दिए कि रिकॉर्ड जीत दर्ज कराई। उस दौरान शपथ पत्र भी जनता को बांटा था, जिसमें लिखे वायदे पूरे नहीं किए गए। गारंटर बल्लू 72 भी गायब हैं। अब विधायक पुत्र का नाम उन लोगों के साथ आ रहा है, जो शहर में गुंडागर्दी के दम पर विवादित प्रोपर्टी कब्जा रहे हैं। विधायक देवेंद्र जैन पर नरेंद्र सिंह तोमर का ठप्पा लगा है, इसलिए सांसद और नपाध्यक्ष से उनका 36 का आंकड़ा बना हुआ है।
सांसद: ज्योतिरादित्य सिंधिया, पार्टी: भाजपा
वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद प्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिराकर भाजपा से पहले राज्यसभा सांसद बने, और फिर 2024 में लोकभाषा चुनाव जीतकर केंद्रीय संचार मंत्री बने।यह अलग बात है कि उनके विभाग का बीएसएनएल ऑफिस से लेकर स्टाफ क्वार्टर खंडहर होते जा रहे हैं। नपाध्यक्ष के खिलाफ पहले विधायक हुए, और फिर विरोधी पार्षदों का नेतृत्व करने वाले रामजी व्यास पर भी नरेंद्र सिंह तोमर का ठप्पा लगा होने की वजह से सिंधिया के नजदीकियों ने यह फीड कर दिया कि यदि नपाध्यक्ष को हटाया तो तोमर गुट की जीत हो जाएगी। जबकि सिंधिया यह नहीं समझ रहे कि नपाध्यक्ष पर कार्यवाही न करने से शहर में उनके हर दिन वोट कट रहे हैं। इसी गुटबाजी के फेर में शिवपुरी शहर बदहाल है, और अधिकारी एक नेता को साधकर इस जिले को चारागाह की तरह चर रहे हैं।








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