
सावधान: घर के बाहर खड़ा मवेशी कहीं आपका पेट न फाड़ दे, आशा के पेट में आए 40 टांके
शहर में आवारा मवेशी बन रहे जान के दुश्मन, कई लोग गंवा चुके हैं जान, टकराकर हो रहा फैक्चर
शिवपुरी। शहर को आधुनिक पर्यटन नगरी बनाने का दावा किया जा रहा है, जबकि आवारा मवेशी शहरवासियों की जान लेने पर उतारू हैं। गुरुवार की सुबह शांतिनगर कॉलोनी में रहने वाली आंगनबाड़ी सहायिका आशा सक्सेना के पेट में गाय ने सींग मार दिया। आशा को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया, उनके पेट को सींग से ऐसा फाड़ा कि उसमें 40 टांके लगाने पड़े। उनकी हालत अभी भी स्थित बनी हुई है।
शिवपुरी शहर में आवारा मवेशियों का शिकार होकर लगभग आधा दर्जन लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि डेढ़ दर्जन से अधिक लोगों के पैर या हाथ में रॉड डालने की वजह से वो स्थाई विकलांगता का शिकार बन गए। लोगों का अच्छा भला सामान्य जीवन खराब हो गया। ट्रैफिक पुलिस के एक कर्मचारी को तो शहर में घूमने वाले एक सांड ने इतनी बार उठाकर पटका कि जहां भी ट्रैफिक कर्मी और सांड की नजरें मिलतीं तो वो एक-दूसरें को पहचान लेते। ट्रेफिककर्मी उससे बचकर भागता है, और वो सांड उसे मारने के लिए दौड़ता है।
एक तरफ जहां आवारा मवेशी आमजन की जान के लिए खतरा बने हुए हैं, तो वहीं दूसरी तरफ आवारा कुत्तों की टोलियां भी हर दिन कई लोगों को काटकर अस्पताल पहुंचा रही हैं। जिस शहर में आवारा जानवरों का इतना आतंक हो, उस नगर को आधुनिक पर्यटन नगरी बनाने के लिए क्या शुरुआत आवारा जानवरों को प्रतिबंधित करके की जानी चाहिए।
गाय की सींग का शिकार होकर अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहीं आशा के बेटे राहुल का कहना है कि शिवपुरी शहर में आवारा मवेशी व कुत्ते लोगों के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं। इन्हें पकड़कर शहर से बाहर करने की दिशा में कोई पहल नहीं कर रहा, आज मेरी मां जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही है, मैं नहीं चाहता कि फिर किसी की मां के साथ ऐसी गम्भीर घटना ना हो।









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