
सांसद आते है स्वागत कराने, प्रभारी मंत्री दे रहे खूबसूरत शहर का भरोसा, शिवपुरी के रंगमंच पर जनता देख रही नेताओं की अदाकारी
नगरपालिका में चल रहा द्वंद, शासन आदेश को ठेंगा बताकर वापस आए सीएमओ, पार्षद कह रहे दर्ज करो मामला
शिवपुरी।यूं तो शिवपुरी जिले में 5 विधायक,दो सांसद, एक प्रभारी मंत्री मौजूद हैं, लेकिन चल सिर्फ एक सांसद (गुना/शिवपुरी) की चल रही है। वो सांसद शहर में सिर्फ स्वागत करवाने आते है, जबकि प्रभारी मंत्री हर बार गंदगी ढूंढने और शहर को खूबसूरत बनाने का भरोसा देकर चले जाते हैं। शहर को सुंदर बनाने की जिम्मेदारी नगरपालिका पर है, जिसमें घमासान चल रहा है। शासन के निलंबन आदेश को ठेंगा दिखाकर सीएमओ न्यायालय से स्टे लेकर वापस आ गए, तो उधर पार्षद भ्रष्टाचार के मामले।में नपाध्यक्ष, सीएमओ व बागड़ी का नाम बढ़ाने के लिए आवेदन देते फिर रहे हैं। कुल मिलाकर शिवपुरी के रंगमंच पर चल रही नेताओं की अदाकारी को जनता देख रही है, जिसका जवाब वो आगामी चुनाव में देगी।
शिवपुरी की 5 विधानसभा में से करेरा व पोहरी के सांसद ग्वालियर के भारत सिंह कुशवाह हैं, जो पिछले दिनों नरवर में आयोजित मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में पहली बार नजर आए। पोहरी विधायक कांग्रेसी हैं, जबकि करेरा विधायक नरेंद्र सिंह तोमर गुट के हैं। शिवपुरी विधायक देवेंद्र जैन का यूं तो कोई गॉडफादर नहीं है, क्योंकि वो चुनाव में माल देकर टिकट लाते हैं l पिछोर विधायक तो पूर्व विधायक से ही उलझने में व्यस्त हैं, ऐसे में एकमात्र कोलारस विधायक ही गुना-शिवपुरी सांसद के नजदीकी हैं। लेकिन पिछले माह में करोड़ों की चरस के साथ पकड़े गए आरोपी से उनका नाम जोड़कर पोहरी विधायक बलैया ले रहे हैं।
गुना-शिवपुरी सांसद जब भी आते हैं, सरकार द्वारा स्वीकृत कार्यों को अपनी सौगात बताकर स्वागत करवाकर चले जाते हैं। पहला स्वागत सहकारी बैंक को 50 करोड़ दिलवाने का श्रेय खुद लेकर, करवाया, जबकि हितग्राही अभी भी अपने पैसे के लिए भटक रहे हैं। नपाध्यक्ष को सांसद का ऐसा संरक्षण है, कि शिवपुरी विधायक ने अपना पत्र ही फर्जी बताकर पुलिस में आवेदन दे दिया। नपा में भ्रष्टाचार की अभी सीमाएं पार हो गई, लेकिन प्रभारी मंत्री उस संबंध में कोई बात करने की बजाए मिलकर विकास का दावा कर रहे हैं। ऐसी ही नौटंकी करके शेष बचा कार्यकाल भी गुजर जाएगा, और हर बार की तरह शहर की जनता खुद को ठगा महसूस करती रह जाएगी। किसी का कहना था कि यदि सभी सुविधाएं शहर को मिल जाएंगी, तो फिर इन नेताओं के कार्यक्रम में भीड़ कैसे आएगी, इसलिए यह नेता शहर को समस्याग्रस्त बनाए रखना चाहते हैं। क्योंकि अब कार्यक्रमों में नेता को सुनने के लिए अपने मन से कोई नहीं आता, कुछ भीड़ सरकारी कर्मचारी, कुछ रुपयों में लाई गई जनता, और शेष भीड़ आवेदन देने वालों की होती है।







