
5 बीघा जमीन पर कब्जा करने दो बार किया परिवार पर जानलेवा हमला, कार्रवाई शून्य
जुलाई में हुई मारपीट में आए थे सिर में 11 टांके, हर बार कर रहा शिकायत, अब तो एसपी से भी नहीं मिलने दिया
शिवपुरी। जिले के कोलारस विधानसभा की लुकवासा चौकी अंतर्गत ग्राम डोंडियाई में रहने वाले एक परिवार के साथ उसी गांव के दबंग दो बार जानलेवा हमला कर चुके हैं। हर बार पुलिस मामूली धाराओं में प्रकरण दर्ज करके मामले को रफा दफा कर देती है। पीड़ित युवक जुलाई से दिसंबर तक कई बार आवेदन दे चुका, लेकिन आज तो एसपी ऑफिस में तैनात गार्ड ने बाहर से ही चलता कर दिया। महत्वपूर्ण बात यह है कि पीड़ित युवक साइंस से स्नातक है, तथा पुलिस को किन धाराओं में मामला दर्ज करना चाहिए, वो बाजार से पुलिस की धाराओं की किताब भी लेकर घूम रहा है।
पुलिस चौकी लुकवासा के ग्राम डोंडियाई में रहने वाले संतोष पुत्र लालाराम जाटव ने बताया कि गांव में हमारी 5 बीघा जमीन का पट्टा है, जिस पर गांव के ही सुल्तान, परमाल, मंगल खंगार कब्जा करना चाहते हैं, और हमारी जमीन का रास्ता बंद करके हमें जमीन पर जाने भी नहीं दे रहे।
बकौल संतोष, बीते 28 जुलाई को जब वो अपनी मां की दवाई लेने जा रहा था, तभी रास्ते में सुल्तान खंगार मिला, और उसने सिर में फरसा मार दिया। इसी बीच मंगल ने कुल्हाड़ी और परमाल ने भी फरसे से हमला कर दिया। झगड़े की आवाज सुनकर जब संतोष की मां संपत बाई आई तो उसमें भी फरसा मार दिया। इस हमले में संतोष के सिर में 11 टांके आए थे, लेकिन जुलाई की घटना में अभी तक पुलिस उनके घर नहीं। आई। इस मामले में पुलिस ने मामूली धाराओं में प्रकरण दर्ज कर थाने से ही जमानत पर छोड़ दिया।
संतोष ने बताया कि इससे पहले जून 2020 में भी उक्त लोगों ने हमला करके माता-पिता व भाई-बहन को भी जख्मी कर दिया था। लेकिन उस समय भी आरोपियों के पत्रकार रिश्तेदार के दवाब में आकर उनके खिलाफ कार्यवाही करने की बजाए उल्टे पीड़ित पक्ष को ही आरोपी बनाकर जेल भेज दिया था। जुलाई से लगातार संतोष समय समय पर जनसुनवाई में पुलिस अधीक्षक को आवेदन दे रहा है, तथा उसे हर बार कार्यवाही का झूठा आश्वासन देकर टरका दिया जाता है। इस बार तो एसपी ऑफिस के पहरेदारों ने संतोष को एसपी से भी नहीं मिलने दिया, तथा आवक-जावक में आवेदन दिलवाकर चलता कर दिया। जिले में कानून व्यवस्था की स्थिति पहले से ही खराब है, और संतोष जैसे लोग हमलों को झेलने के बाद सिर्फ आवेदन ही देते घूम रहे हैं।







