
शिवपुरी विधायक ने नगरपालिका को नरक पालिका बताया, अब पोहरी में शुरू हुई तकरार
शिवपुरी। जिला मुख्यालय की नगरपालिका हो या नगर परिषद, सभी जगह स्थानीय विधायकों से अध्यक्षों की पटरी नहीं बैठ रही। नगरपालिका को जहां शिवपुरी विधायक पहले ही नरक पालिका कह चुके हैं, तो वहीं नगर परिषद पोहरी की अध्यक्ष भी पोहरी विधायक को निट्ठल्ला बोल दिया। टकराव की स्थिति के बीच क्षेत्र के विकास की कल्पना करना ही बेमानी है।
गौरतलब है कि शिवपुरी शहर की बदहाली को देखते हुए पिछले दिनों प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवपुरी विधायक देवेंद्र जैन ने कहा था कि शिवपुरी की नगर पालिका को नरक पालिका कहना चाहिए। इन हालातों के बीच शिवपुरी शहर का विकास कैसे होगा?, जब नगरपालिका और विधायक के बीच सामंजस्य नहीं बैठ पा रहा। इसकी वजह भी स्पष्ट है कि नगरपालिका में शहर विकास को छोड़कर सभी जिम्मेदार सिर्फ कमीशनखोरी में लगे हैं। नपा में ठेकेदार काम करने को तैयार नहीं हां, क्योंकि कमीशन इतना अधिक मांगा जा रहा है कि बची हुई राशि से काम करना मुश्किल हो रहा है। इतना ही नहीं नपाध्यक्ष की कमाई का एक बड़ा हिस्सा अपने बेटे के केस को सुलझाने में खर्च हो रहा है। हालांकि यह तो पुरानी कहावत है कि दो नंबर का पैसा जैसा आता है, वैसे ही वो वापस भी जाता है, और साथ में मेहनत का पैसा भी ले जाता है।
उधर पोहरी विधायक कैलाश कुशवाह ने पिछले दिनों नगर परिषद कार्यालय पहुंचकर वहां चल रहे भ्रष्टाचार को ना केवल उजागर किया, बल्कि नगर परिषद अध्यक्ष और सीएमओ पर खुलेआम भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए धरना प्रदर्शन की चेतावनी दी। जिसके चलते पोहरी नगर परिषद अध्यक्ष रश्मि वर्मा ने कहा कि विधायक ने खुद कोई काम नहीं किया, उन्हें बस दूसरों पर आरोप लगाना आता है। रश्मि ने कहा कि हमने तो 10 करोड़ के विकास कार्य करवा दिए, लेकिन विधायक ने अभी तक एक भी कार्य नहीं करवाया।
जनप्रतिनिधियों की तकरार के बीच जनता मूक
शहर और नगर विकास के लिए नपाध्यक्ष और नगर परिषद अध्यक्ष चुने जाते हैं, जबकि पूरे विधानसभा के लिए विधायक जीतकर आते हैं। अब जबकि यह दोनों प्रमुख पदों पर विराजमान जनप्रतिनिधि ही कुत्ते-बिल्ली की तरह लड़ रहे हैं, तो ऐसे में नगर विकास हो पाएगा, इसमें संशय ही बना हुआ है।
अन्य जगह सामंजस्य से काम
शिवपुरी की करेरा और नरवर नगर परिषद अध्यक्षों और विधायक के बीच अभी तो सामंजस्य बना हुआ है, इसलिए वहां से विरोध के सुर सुनाई नहीं दे रहे। यही स्थिति कोलारस और बदरवास में है, क्योंकि यहां कमान संभालने वाले अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को बरसों पुराना अनुभव है, जिससे वो विधायक से सामंजस्य बनाए हुए हैं।








